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Maharashtra New RTI Rules 2026: तीन गुना फीस, ID प्रूफ की शर्त और पूछने की वजह भी… आखिर क्यों मचा है बवाल?

महाराष्ट्र सरकार के नए RTI नियम 2026 से सूचना मांगना महंगा और मुश्किल हुआ. 3 गुना फीस, ID प्रूफ और 150 शब्दों की पाबंदी पर क्यों भड़के एक्टिविस्ट? पूरी खबर पढ़ें...

By: Shivani Singh | Published: June 18, 2026 1:12:56 PM IST



महाराष्ट्र सरकार के नए आरटीआई नियम 2026 (RTI Rules, 2026) को लेकर आरटीआई कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच भारी चिंता और नाराजगी देखी जा रही है. आलोचकों का साफ कहना है कि इन नए नियमों के कई प्रावधान आम नागरिकों के लिए बड़ी रुकावटें पैदा करेंगे, जिससे 2005 के ऐतिहासिक सूचना का अधिकार कानून की मूल भावना ही खत्म हो जाएगी.

12 जून को अधिसूचित किए गए इन नए नियमों ने महाराष्ट्र में आरटीआई आवेदनों से जुड़े पुराने ढांचे की जगह ले ली है. सरकार का तर्क है कि ये बदलाव प्रक्रिया को आसान बनाने और आरटीआई के दुरुपयोग को रोकने के लिए किए गए हैं. लेकिन, जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का मानना है कि ये नियम सूचना मांगने वालों के रास्ते में बेवजह के रोड़े अटकाने जैसे हैं.

Maharashtra New RTI Rules 2026: तीन गुना फीस, ID प्रूफ की शर्त और पूछने की वजह भी… आखिर क्यों मचा है बवाल?

जेब पर पड़ेगा सीधा असर 

नए नियमों में जो सबसे बड़ा बदलाव किया गया है, वह है फीस का बोझ बढ़ाना:

  • आरटीआई एप्लिकेशन फीस को तीन गुना बढ़ाकर 10 रुपये से सीधे 30 रुपये कर दिया गया है.
  • कागजात की कॉपी लेने का खर्च भी 2 रुपये से बढ़ाकर 5 रुपये प्रति पेज कर दिया गया है.
  • अगर कोई रिकॉर्ड देखना चाहता है, तो पहले एक घंटे के बाद हर घंटे के लिए 50 रुपये देने होंगे.
  • जन सूचना अधिकारियों (PIO) के फैसलों के खिलाफ पहली अपील के लिए 50 रुपये और राज्य सूचना आयोग के पास दूसरी अपील के लिए 100 रुपये की फीस तय कर दी गई है.

शब्दों और विषयों की सख्त पाबंदी

फीस के अलावा, 2026 के नियमों में कुछ ऐसे कड़े नियम जोड़ दिए गए हैं जो आवेदकों के हाथ बांध देंगे:

  • अब हर आरटीआई आवेदन में सिर्फ एक ही विषय होना चाहिए और शब्द सीमा लगभग 150 शब्द तय कर दी गई है.
  • अगर किसी आवेदन में एक से ज्यादा सवाल या मुद्दे हैं, तो जन सूचना अधिकारी (PIO) सिर्फ पहले सवाल का जवाब देगा और बाकी के लिए आवेदक को अलग से नए आवेदन करने को कह सकता है.

पहचान पत्र की अनिवार्यता पर विवाद

नए नियमों के तहत, अब हर आवेदक को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए आवेदन के साथ स्व-सत्यापित (self-attested) फोटो पहचान पत्र लगाना जरूरी होगा। अगर आईडी प्रूफ नहीं दिया गया, तो आवेदन वापस लौटाया जा सकता है. कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह नियम आरटीआई अधिनियम के मूल उद्देश्य के खिलाफ है.

अधिकारियों को मिले नए अधिकार

नए नियम पीआईओ (PIO) को जानकारी देने से मना करने की ज्यादा छूट देते हैं:

अगर मांगी गई जानकारी पहले से सरकारी वेबसाइट पर है, तो अधिकारी उसकी कॉपी देने के बजाय सिर्फ वेबसाइट का लिंक देकर पल्ला झाड़ सकते हैं. इसके अलावा, बार-बार आने वाले आवेदनों को अब बिना किसी लंबी सुनवाई के सीधे खारिज किया जा सकता है.

कुछ डिजिटल और राहत भरी बातें

हालांकि, 2026 के इन नियमों में कुछ आधुनिक बदलाव भी किए गए हैं:

  • आरटीआई फीस का भुगतान अब UPI और अन्य डिजिटल माध्यमों से किया जा सकेगा.
  • ईमेल के जरिए बातचीत को अब आधिकारिक तौर पर मान्यता दे दी गई है.
  • गरीबी रेखा के नीचे (BPL) आने वाले नागरिकों को फीस से छूट मिलती रहेगी, लेकिन अब इसकी भी एक सीमा तय कर दी गई है बड़ी फाइलों में से केवल पहले 50 पेज ही मुफ्त दिए जाएंगे.

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