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शराब के शौकीनों को बड़ा झटका! ओल्ड मोंक और रॉयल चैलेंज सहित कई ब्रांड्स पर लगा बैन, आखिर क्यों रोकी गई बिक्री

FSSAI ने Old Monk, Royal Challenge समेत कई बड़े शराब ब्रांड्स पर कार्रवाई करते हुए रोक लगा दी है. जानिए आखिर लैब रिपोर्ट में क्या निकला.

By: Shivani Singh | Published: August 3, 2026 10:30:39 PM IST



भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ओल्ड मोंक, एंटीक्विटी ब्लू, रॉयल चैलेंज और बैगपाइपर डीलक्स जैसे कुछ बेहद मशहूर शराब ब्रांड्स के खास वेरियंट्स की बिक्री पर रोक लगा दी है. FSSAI की इस कार्रवाई के पीछे की मुख्य वजह यह है कि इन प्रोडक्ट्स में ऐसे आर्टिफिशियल (कृत्रिम) फ्लेवर्स का इस्तेमाल किया जा रहा था, जो तय मानकों के बिल्कुल खिलाफ हैं. 

जांच में सामने आया कि डियाजियो इंडिया की यूनाइटेड स्पिरिट्स (United Spirits), इनब्रू बेवरेजेस (Inbrew Beverages) और मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर (Mohan Rocky Springwater) जैसी कंपनियां शराब में सही सुगंध और स्वाद लाने के लिए पारंपरिक मैच्योरेशन (पकाने/पुराना करने) की प्रक्रिया और प्राकृतिक घटकों की जगह बाहर से मिलाए गए आर्टिफिशियल या ‘नेचर-आइडेंटिकल’ फ्लेवर्स का इस्तेमाल कर रही थीं.

कहाँ-कहाँ लगी है बिक्री पर रोक?

FSSAI ने अलग-अलग राज्यों में इन चुनिंदा ब्रांड्स की बिक्री रोकी है

मध्य प्रदेश में यूनाइटेड स्पिरिट्स की एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की और रॉयल चैलेंज व्हिस्की के साथ-साथ इनब्रू बेवरेजेस की बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की और ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम पर बैन लगाया गया है. महाराष्ट्र में यहाँ मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर द्वारा बनाई जाने वाली ओल्ड मोंक के तीन अलग-अलग वेरियंट्स की बिक्री पर रोक लगाई गई है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी यह पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है कि यह बैन सिर्फ इन खास फैक्ट्रियों/लोकेशनों में बनी बोतलों पर लागू है या फिर देश भर में इन ब्रांड्स के बाकी प्लांट से आने वाले स्टॉक पर भी इसका असर पड़ेगा.

लैब टेस्ट में हुआ यह चौंकाने वाला खुलासा

भारत के खाद्य सुरक्षा नियमों के मुताबिक, अल्कोहलिक बेवरेजेस (शराब) में कुछ हद तक प्राकृतिक फ्लेवरिंग एजेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन जब FSSAI की सरकारी लैब में इन ब्रांड्स के सैंपल टेस्ट किए गए, तो बेहद अजीब बात सामने आई—कंपनियां व्हिस्की में अलग से ‘व्हिस्की फ्लेवर’ और रम में अलग से ‘रम फ्लेवर’ मिला रही थीं. भारतीय नियमों में इस तरह से ऊपर से फ्लेवर मिलाने की सख्त मनाही है.

शराब बाजार पर इसका क्या असर होगा?

भारत दुनिया के सबसे बड़े शराब बाजारों में से एक है, जहाँ इस इंडस्ट्री का सालाना कारोबार लगभग 40 अरब डॉलर (करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये) का है.

डियाजियो इंडिया (यूनाइटेड स्पिरिट्स के जरिए) भारत की सबसे बड़ी शराब कंपनी है, जिसकी सीधी टक्कर फ्रांस की पर्नोड रिकॉर्ड (Pernod Ricard) से रहती है.

जिन ब्रांड्स पर FSSAI ने यह कार्रवाई की है, वे सभी भारत में ही बनते हैं (डोमेस्टिक ब्रांड्स). इम्पोर्टेड स्कॉच या प्रीमियम रम्स की तुलना में इनकी कीमत कम होती है, जिसकी वजह से आम लोगों के बीच इनकी खपत बहुत ज्यादा है.

FSSAI इन दिनों खाने-पीने की चीज़ों और बेवरेजेस की क्वालिटी को लेकर काफी सख्त रुख अपनाए हुए है, और यह कार्रवाई उसी देशव्यापी जांच अभियान का हिस्सा मानी जा रही है.

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