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EPF Salary Limit Increase: अब 25 हजार सैलरी वालों का भी कटेगा PF, जानें किसे और कब से मिलेगा फायदा

EPFO Wage Limit: नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खबर! वित्त मंत्रालय ने EPF सैलरी लिमिट ₹25,000 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. जानिए कब से लागू होगा नया नियम और किसे मिलेगा फायदा.

By: Shivani Singh | Published: August 3, 2026 8:06:11 PM IST



कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़ा एक बड़ा अपडेट सामने आया है. वित्त मंत्रालय ने EPF योजना के तहत अनिवार्य वेतन सीमा (Wage Ceiling) को मौजूदा ₹15,000 प्रति माह से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है.

हालांकि, शुरुआत में इस सीमा को ₹30,000 करने की योजना थी, लेकिन फिलहाल ₹25,000 के प्रस्ताव पर सहमति बनी है. इस बदलाव को पूरी तरह लागू करने के लिए अब केंद्रीय कैबिनेट की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक यह जानकारी सामने आई है, हालांकि EPFO की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.

क्या है सरकार का फैसला और मकसद?

इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश के एक बड़े कामकाजी वर्ग को EPF और पेंशन योजनाओं के दायरे में लाना है. फिलहाल EPFO के नियमों के तहत केवल वही कर्मचारी अनिवार्य PF कटौती के दायरे में आते हैं, जिनका बेसिक वेतन ₹15,000 तक है. इससे अधिक बेसिक सैलरी वालों के लिए PF से जुड़ना ऐच्छिक (Optional) होता है.

वेतन सीमा बढ़कर ₹25,000 होने से उन लाखों कर्मचारियों का भी अनिवार्य रूप से PF कटने लगेगा, जिनकी मासिक बेसिक सैलरी ₹25,000 तक है. इससे उन्हें सीधे तौर पर प्रोविडेंट फंड और पेंशन स्कीम का सुरक्षा चक्र मिलेगा.

कब से लागू हो सकता है नया नियम?

वित्त मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट के सामने रखा जाएगा. कैबिनेट से हरी झंडी मिलते ही इसे लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे.

कंपनियों को अपने पेरोल सिस्टम और नियमों में बदलाव करने के लिए सरकार की ओर से थोड़ा समय (ट्रांजिशन पीरियड) दिया जाएगा. रिपोर्टों की मानें तो नया नियम 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी हो सकता है.

कंपनियों और सरकार पर क्या पड़ेगा असर?

वेतन सीमा में बढ़ोतरी का सीधा असर कंपनियों और सरकार दोनों के वित्तीय बोझ पर पड़ेगा:

कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत नियोक्ता (कंपनी) कर्मचारी के बेसिक वेतन का 8.33% योगदान देती है, जबकि केंद्र सरकार 1.16% का योगदान करती है. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने EPS के तहत 11,144 करोड़ का बजट आवंटित किया है. सैलरी लिमिट बढ़ने से सरकार और कंपनियों दोनों का अंशदान बढ़ेगा, जिससे उन पर वित्तीय दायित्व बढ़ सकता है.

किन कर्मचारियों को मिलेगा इसका सीधा फायदा?

इसका लाभ उन निजी कंपनियों के कर्मचारियों को मिलेगा जहां 20 या उससे अधिक कर्मचारी काम करते हैं. जिन संस्थानों में 20 से कम कर्मचारी हैं, वे चाहें तो स्वेच्छा से EPFO से जुड़ सकते हैं, लेकिन उनके लिए यह अनिवार्य नहीं है. केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए अलग से पेंशन व्यवस्था लागू होती है, इसलिए EPS के ये नियम उन पर लागू नहीं होंगे.

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