Home > व्यापार > Dairy Farming Success Story: फसल ने दिया धोखा, डेयरी फार्मिंग बनी सहारा, आज हर महीने हो रही है बढ़िया कमाई

Dairy Farming Success Story: फसल ने दिया धोखा, डेयरी फार्मिंग बनी सहारा, आज हर महीने हो रही है बढ़िया कमाई

Dairy Farming Success Story: तेलंगाना के किसान सदानंद ने फसल में लगातार नुकसान के बाद डेयरी फार्मिंग का रास्ता चुना. आज उनकी मेहनत और बेहतर प्रबंधन उन्हें हर महीने अच्छी और स्थिर आय दिला रहे हैं.

By: Munna Verma | Published: August 6, 2026 11:58:42 AM IST



Dairy Farming Success Story: खेती में लगातार बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितता के कारण कई किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे समय में कुछ किसान हार मानने के बजाय नए अवसर तलाशते हैं और सफलता की नई कहानी लिखते हैं. तेलंगाना के वारंगल अर्बन जिले के भीमदेवरापल्ली मंडल स्थित मुल्कनूर गांव के युवा किसान सदानंद भी ऐसे ही किसानों में शामिल हैं. पारंपरिक खेती में घाटा होने के बाद उन्होंने डेयरी फार्मिंग को अपनाया और आज हर महीने अच्छी कमाई कर रहे हैं.

सदानंद पहले कपास और मिर्च जैसी नकदी फसलों की खेती करते थे. लेकिन लगातार नुकसान के कारण उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगी. इस कठिन दौर में उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पशु विशेषज्ञ डॉ. मोंडय्या की सलाह पर उन्होंने डेयरी व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया. यही निर्णय उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ.

एक गाय से शुरू हुआ सफर

डेयरी फार्मिंग की शुरुआत उन्होंने केवल एक गाय से की थी. मेहनत, सही प्रबंधन और पशुओं की बेहतर देखभाल के दम पर आज उनके फार्म में 10 गायें और 3 भैंसें हैं. कुल मिलाकर उनके पास 15 दुधारू पशु हैं, जो उनकी नियमित आय का मुख्य स्रोत बन चुके हैं.

पशुओं की बेहतर देखभाल है सफलता की कुंजी

सदानंद का मानना है कि डेयरी व्यवसाय में पशुओं की सेहत सबसे महत्वपूर्ण होती है. इसलिए वे अपने सभी पशुओं की बच्चों की तरह देखभाल करते हैं. उन्हें दिन में दो बार साफ-सफाई और स्नान कराया जाता है. हर 15 दिन में पशु चिकित्सक से स्वास्थ्य जांच भी कराई जाती है ताकि किसी बीमारी का समय रहते इलाज हो सके. पशुओं के संतुलित आहार का भी विशेष ध्यान रखा जाता है. उन्हें कपास की खली, चावल का भूसा, चोकर, मक्के का आटा, मिनरल मिक्सचर और कैल्शियम नियमित रूप से दिया जाता है, जिससे दूध उत्पादन बेहतर बना रहता है.

हर महीने हो रही शानदार कमाई

सदानंद प्रतिदिन करीब 50 से 60 लीटर दूध मुल्कनूर डेयरी को बेचते हैं. दूध बिक्री से उन्हें हर महीने लगभग 50,000 रुपये से 60,000 रुपये की आय होती है. पशुओं के चारे, दवाइयों और अन्य खर्चों पर 20,000 रुपये से 25,000 रुपये तक खर्च होता है. सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें करीब 35,000 रुपये से 40,000 रुपये का शुद्ध मुनाफा मिलता है.

आधुनिक तकनीक से बढ़ाई आय

अपने डेयरी फार्म को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सदानंद आधुनिक उपकरणों का उपयोग करते हैं. घास काटने की मशीन और दूध निकालने वाली मशीन जैसी तकनीकों ने उनका समय और श्रम दोनों बचाया है. इससे उत्पादन क्षमता भी बढ़ी है और काम आसान हुआ है.

किसानों के लिए प्रेरणादायक संदेश

सदानंद का कहना है कि खेती में नुकसान होने पर निराश होने के बजाय किसानों को आय के वैकल्पिक स्रोतों पर ध्यान देना चाहिए. डेयरी फार्मिंग जैसे सहायक व्यवसाय न केवल नियमित आय देते हैं, बल्कि खेती के जोखिम को भी काफी हद तक कम करते हैं. उनकी सफलता यह साबित करती है कि सही योजना, मेहनत और आधुनिक तकनीक के सहारे किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं.

ये भी पढ़ें…

Sarkari Naukri: 134000 से अधिक चाहिए सैलरी, तो फटाफट यहां करें आवेदन, बस करना है ये काम

Advertisement