ATM Cash Alert: क्या आपके पास कैश खत्म हो गया है और क्या आप ATM से पैसे निकालने का प्लान बना रहे हैं? अगर हाँ, तो यह खबर आपके लिए बहुत ज़रूरी है. आने वाले दिनों में आपको ATM के बाहर लंबी लाइनें दिख सकती हैं, और आपके आस-पास के किसी ATM पर “कैश नहीं” का साइन लगा हुआ मिल सकता है. असल में, कुछ राज्यों में ATM में कैश लोड करने वाली कंपनियों के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है. अगर यह हड़ताल जारी रही, तो लोगों को कैश की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है.
यह हड़ताल क्यों हो रही है?
इस हड़ताल का मुख्य कारण सैलरी बढ़ाने का विवाद है. ATM में कैश लोड करने और उसे मैनेज करने वाले कर्मचारी सैलरी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे काम पर नहीं लौटेंगे. अगर यह हड़ताल जल्द खत्म नहीं हुई, तो ATM से नए नोट नहीं निकल पाएंगे. इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा, क्योंकि ATM में कैश खत्म होते ही मशीनें खाली हो जाएंगी.
कौन से राज्य सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं?
अभी इस हड़ताल का असर कुछ चुनिंदा राज्यों में दिख रहा है, जिनमें उत्तर प्रदेश,दिल्ली और हरियाणा शामिल हैं.राहत की बात यह है कि यह हड़ताल अभी कुछ इलाकों तक ही सीमित है, लेकिन अगर जल्द ही बैंकों और कंपनियों के बीच बातचीत से कोई हल नहीं निकला, तो यह संकट दूसरे राज्यों में भी फैल सकता है.
सरकारी बैंक के ATM पर सबसे ज़्यादा असर पड़ेगा
इस हड़ताल का सबसे ज़्यादा असर आउटसोर्स किए गए ATM पर पड़ेगा, यानी जिन्हें कैश मैनेजमेंट कंपनियां मैनेज करती हैं.
सरकारी बैंक: अगर हड़ताल लंबे समय तक चलती है, तो सबसे ज़्यादा दिक्कत सरकारी बैंक के ATM पर होगी, क्योंकि उनका नेटवर्क बड़ा है और रोज़ाना बड़ी संख्या में लोग पैसे निकालते हैं.
कौन सी कंपनियां शामिल हैं?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश की दो बड़ी कैश डिलीवरी कंपनियों – हिताची पेमेंट सर्विसेज़ और CMS इंफो सिस्टम्स – के कर्मचारियों ने यह कदम उठाया है. ये कंपनियां देश के एक बड़े हिस्से में ATM तक कैश पहुंचाती हैं.
ATM इंडस्ट्री (CATMi) का क्या कहना है? कन्फेडरेशन ऑफ ATM इंडस्ट्री (CATMi) ने इस मामले पर चिंता जताई है. पिछले महीने, संगठन ने इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) को एक लेटर लिखकर ATM नेटवर्क पर बढ़ते दबाव की जानकारी दी थी.
बढ़ते खर्च ने बिगाड़ा हिसाब-किताब
CATMi का कहना है कि नए वेज कोड नियमों और डीजल-पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से ATM चलाने का खर्च लगभग 20 परसेंट बढ़ गया है. इससे कंपनियों और कर्मचारियों के बीच सैलरी को लेकर झगड़े होने लगे हैं.