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अमेरिका का नया ‘टैरिफ बम’! रूस से तेल खरीदने पर भारत-चीन को लग सकता है 100 प्रतिशत झटका?

US Tariff Bill: US में रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ लगाने वाले बिल को जबरदस्त सपोर्ट मिला है. 60 से ज़्यादा US सीनेटरों के एक ग्रुप ने इस बिल का सपोर्ट किया है. यह कानून उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाएगा जो रूस से कच्चा तेल और नैचुरल गैस खरीदना जारी रखते हैं.

By: Shristi S | Published: July 17, 2026 4:39:18 PM IST



US Russia Oil Tariff Bill: US में रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ लगाने वाले बिल को जबरदस्त सपोर्ट मिला है. 60 से ज़्यादा US सीनेटरों के एक ग्रुप ने इस बिल का सपोर्ट किया है. यह कानून उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाएगा जो रूस से कच्चा तेल और नैचुरल गैस खरीदना जारी रखते हैं. इसे रूस की फंडिंग को रोकने के लिए US के सबसे कड़े कदमों में से एक माना जा रहा है.

60 सीनेटरों की मंज़ूरी के साथ, बिल के पास होने की उम्मीद बढ़ गई है. पास होने पर, भारत, चीन, अज़रबैजान और हंगरी जैसे देशों पर रूसी तेल खरीदने पर 100% टैरिफ लगेगा. यह बिल सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने लिखा था, जिनका इस हफ़्ते यूक्रेन से लौटने के बाद अचानक निधन हो गया.

US यूरेनियम इंपोर्ट और उन यूरोपीय सहयोगियों को छूट

हालांकि, यह बिल US यूरेनियम इंपोर्ट और उन यूरोपीय सहयोगियों को भी छूट देता है जो सीमित मात्रा में रूसी गैस खरीदना जारी रखते हैं. यह बिल 15 यूरोपीय खरीदारों को छूट देता है. वे अपनी कुल गैस का 15% से कम इंपोर्ट करते हैं और अपनी निर्भरता कम करने के लिए कदम उठा रहे हैं. इसका मतलब है कि रूस से गैस खरीदने वाले इन देशों पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा. बिल में रूसी यूरेनियम की खरीद पर भी छूट दी गई है, जिसे अमेरिका रूस से बड़ी मात्रा में खरीदता है.

60 से ज़्यादा सीनेटरों के सपोर्ट के साथ, इसे व्हाइट हाउस का भी सपोर्ट मिला है. सीनेटर लिंडसे ग्राहम (R-S.C.) के अचानक इसे पास करने के बाद इस बिल का राजनीतिक महत्व बढ़ गया है. उन्होंने अपनी मौत से पहले एडमिनिस्ट्रेशन के साथ मिलकर इस कानून को बनाने में लगभग दो साल लगाए थे.

12 महीनों के लिए टॉप पांच तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ

सेक्शन 113 इस बिल का मुख्य हिस्सा है. यह प्रेसिडेंट को पिछले 12 महीनों में रूसी कच्चे तेल या नैचुरल गैस के टॉप पांच इंपोर्टर के तौर पर पहचाने गए देशों से, या रूसी तेल पर रोक लगाने वाले टॉप पांच देशों में पहचाने गए देशों से इंपोर्ट किए गए सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का निर्देश देता है. माना जा रहा है कि चीन और भारत इस बिल के मुख्य टारगेट हैं.

यह बिल रूस से सीधे इंपोर्ट होने वाले सामान पर 500% तक टैरिफ लगाने की भी इजाजत देता है. इसमें क्रेमलिन की पॉलिटिकल और मिलिट्री लीडरशिप, उसके सबसे बड़े बैंकों और रूस के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ सख्त बैन का भी प्रावधान है.

अमेरिका का दोगलापन

हालांकि बिल का दायरा बहुत बड़ा है, लेकिन यह यूरेनियम की खरीद को बैन से साफ तौर पर छूट देता है. सेक्शन 114(e) के मुताबिक, एक्ट के नियम कम एनरिच्ड यूरेनियम के इंपोर्ट पर लागू नहीं होते, जो USEC प्राइवेटाइजेशन एक्ट में मौजूदा छूट के तहत आता है, और न ही उस कानून के तहत छूट वाले मेडिकल आइसोटोप पर.

यह छूट इसलिए जरूरी है क्योंकि रूस की सरकारी न्यूक्लियर कंपनी, रोसाटॉम, US न्यूक्लियर पावर प्लांट्स को एनरिच्ड यूरेनियम की एक बड़ी सप्लायर बनी हुई है, जबकि बिल रोसाटॉम के लीडर्स के खिलाफ अलग से बैन लगाने का भी निर्देश देता है. इस नियम की आलोचना करने वालों का तर्क है कि यह दिखाता है कि US रूस पर अपनी एनर्जी डिपेंडेंस को पूरी तरह खत्म करने को तैयार नहीं है, जबकि वह दूसरे देशों से ऐसा करने की मांग कर रहा है.

यूरोप के लिए गैस में छूट

यह बिल उन यूरोपियन साथियों के लिए भी है जो थोड़ी मात्रा में रूसी नैचुरल गैस का इंपोर्ट करते रहते हैं. सेक्शन 113(d) के तहत, अगर किसी देश ने पिछले साल रूस से अपने कुल गैस एक्सपोर्ट का 15% से कम इंपोर्ट किया, तो उसे गैस खरीदने पर नए टैरिफ का सामना नहीं करना पड़ेगा.

यह छूट सिर्फ़ नैचुरल गैस पर लागू होती है, कच्चे तेल पर नहीं, और उन देशों पर लागू नहीं होती जो रूस के टॉप पांच तेल खरीदारों में शामिल हैं. कई EU सदस्य देश अभी भी सीमित मात्रा में रूसी पाइपलाइन और लिक्विफाइड नैचुरल गैस का इंपोर्ट करते हैं क्योंकि वे अपने सप्लाई सोर्स को अलग-अलग करना चाहते हैं.

राष्ट्रपति की छूट का अधिकार

यह कानून राष्ट्रपति को बिल के तहत लगभग किसी भी बैन या टैरिफ को माफ करने का बड़ा अधिकार भी देता है, बशर्ते कांग्रेस को इसकी जानकारी दी जाए और नामंज़ूरी के एक जॉइंट प्रस्ताव के ज़रिए आपत्ति जताने के लिए 30 दिन का समय दिया जाए.

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