नई दिल्ली. अपने आधार नंबर को गलत तरीके से दर्ज करना या टैक्स रिटर्न फाइल या केवाईसी जैसे आधिकारिक दस्तावेजों में गलत आधार नंवब दर्ज करवाना अब भारी पड़ सकता है. ऐसा करने वालों पर भारी जुर्माना लग सकता है. ऐसे मामलों के लिए 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. सरकार आधार कार्ड से जुड़े एक बड़े नियम में संशोधन करने के लिए तैयार हैं, जो आयकर अधिनियम से संबंधित है. एक बार लागू होने के बाद, सरकार गलत आधार नंबर दर्ज करने के लिए 10,000 रुपये का जुर्माना लगा सकती है. जहां भी आधिकारिक उद्देश्य के लिए यह नंबर आवश्यक है वहां धारक को सही आधार नंबर देना होगा. यह संशोधन आईटी अधिनियम की धारा 272 बी के तहत किया जाएगा.

धारक इस बात का ध्यान रखें कि 10,000 रुपये का जुर्माना उस व्यक्ति पर लगाया जाएगा जिसके आधार नंबर का उल्लेख किया गया है और वह व्यक्ति जो आधार संख्या को प्रमाणित करता है. बजट घोषणा के दौरान, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की थी कि 1 सितंबर 2019 से प्रभावी भारत के नागरिक पैन कार्ड के बजाय आधार नंबर का उपयोग कर सकते हैं. उन्होंने कहा था कि आईटी रिटर्न दाखिल करते समय, घर या कार खरीदने जैसे उच्च मूल्य के लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय यात्रा, निवेश आदि के समय आधार कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं.

आधार की गलत जानकारी देने वालों पर 10,000 रुपये तक के जुर्माने की हालिया घोषणा इस अपडेट के साथ जुड़ी हुई है. 10,000 रुपये के भारी जुर्माना की घोषणा करके सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि लोग आवश्यक करों का भुगतान करने से बचने के लिए गलत आधार संख्या का उपयोग नहीं करते हैं. वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, जुर्माना लगाने से पहले सुनवाई होगी, जहां आरोपी व्यक्ति को उसके कार्यों को सही ठहराने का मौका दिया जाएगा. इसी के बाद फैसला लिया जाएगा कि जुर्माना लगाया जाए या नहीं?

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