नई दिल्ली : नए साल की शुरुआत में रोसई घर के बजट में बढ़ोत्तरी होने की पूरी संभवना है. क्योंकि सरसों के तेल और चावल की कीमत आसमान छू रही हैं. हालांकि शर्दी के कारण आलू और प्याज के दाम कम हुए हैं, लेकिन खाने में उपयोग होने वाले सभी खाद्य तेलों मूंगफली, सरसों का तेल, वनस्पती, सोयाबीन, सूरजमुखी और पाम ऑयल की कीमतें एक बार फिर बढ़ गई हैं. इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है. यदि आप भी अपने घर के रोसई बजट को संभालते हैं तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

बता दें कि तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिला है, जिसके चलते पिछले दो महीनों आया बदलाव ज्यादा असरदार है. क्योंकि रोसई घर में बिना किसी तेल के खाना बनाना मुश्किल है ऐसे में तेल की कीमतों में इजाफा देखते हुए यह कहा जा सकता है कि एक बार फिर आम आदमी का रसोई बजट बिगड़ने वाला है. इसके पिछे की अहम वजह है बेमौसम बारिश औेर शीत लहर जिसने राज्यों में सरसों और आलू की फसलों को नुकसान पहुंचाया है.

इन दिनों सरसों के तेल के साथ चावल के दाम भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं. इसके अलावा दाल की कीमतों में भी तेजी का दौर जारी है. गौरतलब है कि, सरसो के तेल की अधिकतम कीमत नवंबर महीने में 175 रुपये प्रति लीटर तक था, जो 31 दिसंबर को बढ़कर 208 रुपये पहुंच गया. वहीं, जुलाई में न्यूनतम कीमत 90 रुपये था वह नवंबर में बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया.

इस विषय पर, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य पदार्थों की कीमत में बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई छह फीसदी की ऊंचाई पर रहने का अनुमान लगाया जा रहा है, इसका बुरा असर मांग बढ़ाने पर हो सकता है क्योंकि कोरोना संकट के कारण लोगों की आय में काफी गिरावट आई है. ऐसे में सरसों के तेल और चावल की कीमतों में वृद्धि होना काफी मुश्किल होने वाला है.

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