नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2019-20 के लिए अपनी पांचवीं द्विमासिक मौद्रिक नीति को लेकर एक बयान जारी किया है. इस बयान के अनुसार मौद्रिक नीति समिति ने 2019-20 के लिए जीडीपी प्रक्षेपण को 6.1 प्रतिशत से 5 प्रतिशत घटाया है. पहले गवर्नर शक्तिकांत दास के नेतृत्व वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने नीतिगत रेपो दर को 5.15% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया. साल 2019 में आरबीआई ने रेपो दर में 135 आधार अंकों की कटौती की है, जो अब तक नौ साल के निचले स्तर 5.15% है, विश्लेषकों को उम्मीद थी कि अन्य 25 आधार अंकों में कटौती होगी.

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि कई सरकारी उपायों और आरबीआई के फैसलों से अर्थव्यवस्था में और गिरावट आने की आशंका है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नवंबर में महंगई दर में तेजी से वृद्धि हुई है और कुछ समय के लिए अधिक रह सकती है. शक्तिकांत दास का कहना है कि अक्टूबर में 8 आधार अंकों (बीपीएस) और नवंबर में 10 बीपीएस द्वारा पॉलिसी रेपो रेट से नीचे औसत कॉल रेट (डब्ल्यूएसीआर) का कारोबार हुआ है.

आरबीआई गवर्नर का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र बैंकिंग इकाई को गैर-बैंक से एक वर्ष से कम अवधि की विदेशी मुद्रा में सावधि जमा स्वीकार करने की अनुमति होगी. बता दें आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के लिए सीपीआई महंगाई दर का अनुमान 5.1 से 4.7 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष 2020-21 की पहली छमाही के लिए 4.0 से 3.8 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है.

ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) ने गुरुवार को एक रिपोर्ट में कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था एक मामूली सुधार के बाद बनी है, जिसमें कराधान, व्यापार नियमों में सुधार और बुनियादी ढांचे को उन्नत करने के लिए कदम उठाने शुरू हो गए हैं. शक्तिकांता दास ने कहा- आरबीआई और सरकार समन्वित तरीके से काम करेंगे. मौद्रिक नीति में कई लक्ष्य नहीं हो सकते और लक्ष्य विकास के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनी रहेगी.

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