नई दिल्ली. 1993 मुंबई हमलों में दोषी याकूब मेमन की फांसी अब तय हो गयी है. सुप्रीम कोर्ट ने आज याकूब की क्युरेटिव पीटीशन को ख़ारिज कर दिया है. अब याकूब को 30 जुलाई को फांसी होना लगभग तय माना जा रहा है.

इससे पहले 9 अप्रैल को पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी बरकरार रखी थी, इसके साथ ही उसकी फांसी पर लगी रोक भी हट गई थी. मेमन ने फांसी की सज़ा को उम्र कैद में बदलने की मांग की थी. याकूब के वकीलों की दलील थी कि वो सिर्फ धमाकों की साजिश में शामिल था न कि धमाकों को अंजाम देने में. याकूब की याचिका खारिज होने के साथ ही उसे कभी भी फांसी देने का रास्ता साफ हो गया था क्योंकि पिछले साल राष्ट्रपति उसकी दया याचिका खारिज कर चुके हैं. इससे पहले 21 मार्च 2013 को सुप्रीम कोर्ट स्पेशल कोर्ट के फांसी की सजा को बरकरार रखने का फैसला सुना चुका है.

गौरतलब है कि इस मामले में 123 अभियुक्त हैं, जिनमें से 12 को निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी जबकि 20 लोगों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई गई. हालांकि उनमें से दो की मौत हो चुकी थी और उनके वारिस मुकदमा लड़ते रहे. इनके अलावा 68 लोगों को उम्र कैद से कम की सज़ा सुनाई गई. जबकि 23 लोगों को निर्दोष मानकर बाइज्जत बरी कर दिया गया .

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