Begusarai News: बिहार के बेगूसराय में मजदूरों का आवेश लगातार बढ़ता जा रहा हैं. बेगूसराय रिफाइनरी में मजदूरों का आंदोलन दूसरे दिन हिंसक हो गया. मुआवजे की मांग को लेकर धरने पर बैठे मजदूरों और पुलिस के बीच टकराव के बाद जमकर बवाल हुआ. इस दौरान रिफाइनरी गेट पर तोड़फोड़, वाहनों में नुकसान और कार्यालय के सामान को क्षतिग्रस्त कर दिया गया. पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया, जिसमें कई मजदूर घायल हो गए.
“लहू की एक-एक बूँद का हिसाब होगा यहाँ,
हक़ मारने वालों का एक दिन बुरा अंजाम होगा यहाँ “
बिहार के बेगूसराय में मजदूरों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है. अपनी विभिन्न मांगों को लेकर श्रमिकों ने विरोध तेज कर दिया है. मजदूरी, बकाया भुगतान, कार्यस्थल पर सुरक्षा और श्रम कानूनों के पालन जैसे मुद्दों पर मजदूरों में नाराजगी देखी जा रही है. कई स्थानों पर प्रदर्शन और नारेबाजी की खबरें सामने आई हैं, जबकि प्रशासन और संबंधित प्रबंधन से जल्द समाधान की मांग की जा रही है.
क्या है मामला?
बताया जा रहा है कि शार्प टैंक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत मजदूर श्याम सुंदर पाठक 29 जून को काम के दौरान लोहे की पाइप गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कुछ दिनों बाद उनकी मौत हो गई. मजदूर की मौत के बाद परिजनों और साथी मजदूरों ने कंपनी से मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन के दौरान कंपनी की ओर से 17 लाख रुपये मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया था. आरोप है कि अब तक यह मुआवजा नहीं दिया गया. इसी मांग को लेकर सोमवार से परिजन और मजदूर भूख हड़ताल पर बैठे थे.
पुलिस के साथ हिंसक टकराव
गौरतलब है कि आंदोलन के दूसरे दिन भी जब कोई समाधान नहीं निकला तो मजदूरों का आक्रोश बढ़ गया. प्रदर्शन उग्र होने पर पुलिस ने हालात नियंत्रित करने का प्रयास किया. इसी दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने का आरोप है, जिसके बाद मजदूर और भड़क गए. गुस्साए मजदूरों ने रिफाइनरी गेट पर जमकर तोड़फोड़ की.
कई गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया, मोटरसाइकिलों में तोड़फोड़ की गई, कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे, एलईडी, ब्रैकेटिंग और अन्य कीमती सामान भी तोड़ दिए गए. प्रारंभिक अनुमान के अनुसार करीब एक करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है.
मामले की और उग्र होने की संभावना
मजदूरों का कहना है कि यदि मृतक के परिजनों को घोषित 17 लाख रुपये का मुआवजा समय पर दे दिया जाता, तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती. मजदूर वर्ग ने कहा कि यदि मृतक को मुआवजा नहीं दिया गया तो यह प्रदर्शन और उग्र होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता.