Bihar News: जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के संकल्प के तहत जिला प्रशासन ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए नाबालिग बालक का विवाह कराने के मामले में 26 वर्षीय महिला समेत कुल 09 लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जन निर्माण केंद्र द्वारा की गई जांच में यह मामला सामने आया कि सुखानी थाना क्षेत्र के एक 16 वर्षीय नाबालिग बालक का अपहरण कर जिरनगच्छ पंचायत में एक 26 वर्षीय महिला के साथ विवाह करा दिया गया. समाज में फैली बुराई के खिलाफ जिला प्रशासन ने ठोस कदम उठाए जाने की बात को कुबूल करते हुए दोषियों पर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया.
प्रशासन मामले की जांच में जुटी
जांच में स्थानीय लोगों तथा नामजद अभियुक्तों की मिलीभगत से बाल विवाह संपन्न कराए जाने की पुष्टि हुई. जन निर्माण केंद्र के जिला परियोजना समन्वयक मु. मुजाहिद आलम ने दोनों प्रकरणों की विस्तृत जांच रिपोर्ट अनुमंडल पदाधिकारी सह बाल विवाह प्रतिषेध पदाधिकारी अनिकेत कुमार को सौंपी.
नाबालिग के दस्तावेजों के आधार पर मामला दर्ज
पुलिस प्रशासन ने बालक के शैक्षणिक दस्तावेज, निकाहनामा एवं अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया गया. जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बालक विधिक रूप से नाबालिग है.
आरोपियों के नामजद कर कार्रवाई शुरू
अनुमंडल पदाधिकारी ने तत्काल संबंधित थाना सुखानी एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी ठाकुरगंज को आवश्यक कानूनी कार्रवाई एवं प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया.
इसके बाद सुखानी थाना कांड संख्या 39/26 के तहत बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम,2006 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की प्रासंगिक धाराओं में मामला दर्ज किया गया. पुलिस ने महिला सहित कुल 9 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दिया है.
सामाजिक बुराई और दंडनीय अपराध
इस संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी अनिकेत कुमार ने कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई होने के साथ गंभीर दंडनीय अपराध है. जो बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों का हनन करता है. इससे सामाजिक उत्थान में रुकावट आता है, और व्यक्ति भी अपने अधिकारों के प्रति जागरुक नहीं हो पाता है.
काननी धाराएं और नियम
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 (PCMA): इस कानून के अनुसार, जिस लड़के की आयु 21 वर्ष से कम हो, उसकी शादी कराना गैरकानूनी है.
सजा का प्रावधान (धारा 9, 10 और 11): बाल विवाह करवाने वाले, उसमें शामिल होने वाले, और उसे बढ़ावा देने वाले (जैसे- माता-पिता, रिश्तेदार, और पंडित या काजी) को 2 साल तक के कठोर कारावास और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है.
नाबालिग होने पर (POCSO एक्ट): यदि लड़का 18 वर्ष से कम उम्र का है, तो उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना ‘यौन शोषण’ माना जाता है, जिस पर पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई होती है.