Bihar Cabinet Expansion 2026: बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार में 22 दिन बाद मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ है. पटना के गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल सैयद अता हसनैन 31 नेताओं को मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाए. इस विस्तार को आगामी चुनावों से पहले एनडीए की बड़ी राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.
नई कैबिनेट में बीजेपी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है. बीजेपी कोटे से 15 मंत्री बनाए जा रहे हैं, जबकि जेडीयू के हिस्से में 13 मंत्री आए हैं. इसके अलावा चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से दो मंत्री, जबकि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और आरएलएम से एक-एक मंत्री को जगह दी गई है. हालांकि संख्या के लिहाज से बीजेपी आगे दिख रही है, लेकिन जेडीयू को भी सत्ता संतुलन में अहम भूमिका दी गई है. दोनों दलों ने मंत्रिमंडल गठन में जातीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपने नेताओं का चयन किया है.
बीजेपी ने सवर्ण और ओबीसी समीकरण पर खेला दांव
बीजेपी ने अपने 15 मंत्रियों में सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश की है. पार्टी ने 6 सवर्ण नेताओं को जगह दी है, जिनमें भूमिहार, राजपूत और ब्राह्मण समुदाय के चेहरे शामिल हैं. वहीं 7 मंत्री ओबीसी और अति पिछड़ा वर्ग से बनाए गए हैं। दो दलित नेताओं को भी मंत्री पद देकर पार्टी ने सामाजिक प्रतिनिधित्व का संदेश दिया है.
बीजेपी की सूची में रामकृपाल यादव, दिलीप जायसवाल, विजय कुमार सिन्हा, नीतीश मिश्रा और श्रेयसी सिंह जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं. इसके अलावा मल्लाह, वैश्य और कानू समाज से भी नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है.
1.राम कृपाल यादव – OBC
2.केदार गुप्ता – कानू/ EBC
3.नीतीश मिश्रा – ब्राह्मण
4.मिथलेश तिवारी – ब्राह्मण
5.रमा निषाद – EBC / मल्लाह
6.विजय कुमार सिन्हा – भूमिहार
7.दिलीप जायसवाल – EBC
8.प्रमोद चंद्रवंशी – EBC
9.लखेन्द्र पासवान – दलित
10.संजय टाइगर- राजपूत
11.इंजीनियर कुमार शैलेन्द्र- भूमिहार
12.नंद किशोर राम- दलित
13.रामचंद्र प्रसाद – वैश्य/ OBC
14. अरुण शंकर प्रसाद – सूढ़ी/ EBC
15. श्रेयसी सिंह – राजपूत
जेडीयू ने ईबीसी और दलित वोट बैंक पर फोकस बढ़ाया
जेडीयू ने अपने 13 मंत्रियों में सबसे ज्यादा फोकस ओबीसी और ईबीसी समुदाय पर किया है. पार्टी ने तीन दलित नेताओं को मंत्री बनाया है, जबकि आठ मंत्री पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग से हैं. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को भी पहली बार कैबिनेट में शामिल किया गया है, जिसे पार्टी के भविष्य के नेतृत्व से जोड़कर देखा जा रहा है. इसके अलावा अशोक चौधरी, श्रवण कुमार, मदन सहनी और शीला मंडल जैसे पुराने चेहरों को फिर मौका मिला है.
1.निशांत कुमार- कुर्मी/ OBC
2.श्रवण कुमार – कुर्मी/ OBC
3.अशोक चौधरी- दलित
4.लेसी सिंह- राजपूत
5.मदन सहनी- मल्लाह/ EBC
6.सुनील कुमार- दलित
7.जमा खान- अल्पसंख्यक
8.भगवान सिंह कुशवाहा- कोइरी/ OBC
9.शीला मंडल- धानुक / EBC
10.दामोदर राउत – धानुक/ EBC
11.बुलो मंडल- गंगोता/ EBC
12.रत्नेश सदा- दलित
एनडीए सहयोगियों को भी मिला प्रतिनिधित्व
चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (आर) से संजय पासवान और संजय सिंह को मंत्री बनाया जा रहा है. वहीं हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा से संतोष मांझी और आरएलएम से दीपक प्रकाश को भी कैबिनेट में शामिल किया गया है.
LJP(R)
संजय पासवान- दलित
संजय सिंह – राजपुत
हम
संतोष मांझी- दलित
आरएलएम-
दीपक प्रकाश – कोइरी
चुनावी संदेश देने की तैयारी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सम्राट चौधरी कैबिनेट का यह विस्तार सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति का हिस्सा है. बीजेपी और जेडीयू दोनों ने जातीय समीकरण साधते हुए अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश की है.
नई कैबिनेट से यह साफ संकेत मिल रहा है कि एनडीए बिहार में सामाजिक संतुलन और नए चेहरों के सहारे चुनावी मैदान में मजबूत पकड़ बनाना चाहती है.