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Bhojpur Encounter: भोजपुर एनकाउंटर पर उठे सवाल, सरेंडर के बाद गोली चलाने की जरूरत थी या नहीं?

Bhojpur Encounter: भोजपुर में पुलिस एनकाउंटर में घायल हुए भरत तिवारी की इलाज के दौरान मौत हो गई. सरेंडर के बाद गोली चलाने के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल उठ रहे हैं.

By: Munna Verma | Published: June 18, 2026 11:30:00 AM IST



Bhojpur Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में हुए एक पुलिस एनकाउंटर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. इस घटना में घायल हुए युवक भरत तिवारी की पटना के पीएमसीएच में इलाज के दौरान मौत हो गई. घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है और स्थानीय स्तर पर कई लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.

जानकारी के अनुसार, भरत तिवारी का नाम उस घटना में सामने आया था जिसमें पुलिसकर्मियों को कथित तौर पर धमकाने और हथियार दिखाने का आरोप लगाया गया था. इसी दौरान पुलिस की ओर से यह भी कहा गया था कि युवक की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी और उसका इलाज मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में कराए जाने की बात सामने आई थी. यही कारण है कि अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि युवक मानसिक रूप से अस्वस्थ था, तो स्थिति को संभालने के लिए अन्य विकल्पों पर कितना विचार किया गया.

सरेंडर का वीडियो बना चर्चा का विषय

घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर एक वीडियो की चर्चा हो रही है. दावा किया जा रहा है कि वीडियो में भरत तिवारी पुलिस के सामने हथियार छोड़ते हुए दिखाई दे रहा है. हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसी आधार पर कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या युवक ने वास्तव में आत्मसमर्पण कर दिया था. यदि ऐसा था, तो फिर पुलिस द्वारा बल प्रयोग की आवश्यकता क्यों पड़ी, यह सवाल लगातार उठ रहा है.

परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि उनके बेटे का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था और उसने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था. परिवार का दावा है कि सरेंडर के बावजूद उस पर गोली चलाई गई. हालांकि इन आरोपों पर पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है.

निष्पक्ष जांच की मांग तेज

भरत तिवारी की मौत के बाद यह मामला केवल एक पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और बल प्रयोग के मानकों पर भी सवाल खड़े कर रहा है. मानवाधिकार, कानून और पुलिसिंग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच बेहद जरूरी होती है.

आगे क्या?

पीएमसीएच में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट क्या कहती है और क्या इस मामले में किसी स्वतंत्र या न्यायिक जांच के आदेश दिए जाते हैं. फिलहाल, भरत तिवारी की मौत ने कई ऐसे प्रश्न छोड़ दिए हैं जिनके जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे.

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