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Aurangabad court news: व्यवहार न्यायालय का सख्त रुख, दो डॉक्टर और पंजी संरक्षक को शोकॉज, वेतन पर रोक के आदेश

Aurangabad court news: औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय ने लंबित मामलों में लापरवाही को लेकर दो डॉक्टरों और एक पंजी संरक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उनके वेतन पर रोक लगा दी है और 10 दिनों में स्पष्टीकरण मांगा है.

By: Ranjana Sharma | Published: April 30, 2026 5:24:56 PM IST



Aurangabad court news: औरंगाबाद में व्यवहार न्यायालय ने लंबित मामलों में लापरवाही को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए दो चिकित्सकों और एक पंजी संरक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. जिला जज पंचम उमेश प्रसाद ने सुनवाई के दौरान न केवल संबंधित अधिकारियों को शोकॉज नोटिस जारी किया, बल्कि उनके वेतन पर भी अगले आदेश तक रोक लगाने का निर्देश दिया है. इस फैसले से प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है.

दो डॉक्टरों के वेतन पर लगी रोक

व्यवहार न्यायालय औरंगाबाद में मदनपुर थाना कांड संख्या-23/15, एसटीआर-299/16, 341/24 की सुनवाई के दौरान सदर अस्पताल के तत्कालीन चिकित्सक डॉ. सुनील कुमार और डॉ. महेंद्र कपूर के वेतन निर्गत पर रोक लगाने का आदेश दिया गया. यह रोक अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी.

ट्रेजरी और डीएम को दिए अनुपालन के निर्देश

न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि ट्रेजरी ऑफिसर और जिला पदाधिकारी इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें. साथ ही सिविल सर्जन को भी निर्देश दिया गया है कि वे आदेश के अनुपालन की जानकारी न्यायालय को उपलब्ध कराएं. अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही के अनुसार, न्यायालय ने दोनों चिकित्सकों को निर्देश दिया है कि वे 10 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें. आरोप है कि न्यायालय के बार-बार निर्देश के बावजूद वे गवाही के लिए उपस्थित नहीं हो रहे थे, जिससे साक्ष्य दर्ज नहीं हो पा रहा था.

पहले भी जारी हो चुके हैं वारंट

दाउदनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पंजी संरक्षक के खिलाफ भी न्यायालय ने कार्रवाई करते हुए उनके वेतन पर रोक लगाने का आदेश दिया है. यह कार्रवाई दाउदनगर थाना कांड संख्या-352/13, एसटीआर-61/24, 107/24 में जख्म प्रतिवेदन प्रस्तुत न किए जाने के कारण की गई है.मामले में पहले ही 27 फरवरी 2025 को जमानती वारंट और 8 अप्रैल 2025 को गैर-जमानती वारंट जारी किए जा चुके थे. इसके बावजूद न्यायालय में उपस्थिति नहीं होने पर अब यह सख्त कदम उठाया गया है.

गवाही लंबित, न्याय प्रक्रिया प्रभावित

जख्म प्रतिवेदन के अभाव में चिकित्सकीय साक्ष्य की गवाही लंबित पड़ी है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. इस मामले में पहले 7 जुलाई 2025 को सम्मन भी जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई. न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि संबंधित अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण दाखिल करना होगा. यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं दिया गया, तो दोनों मामलों में आगे कड़े कानूनी आदेश जारी किए जाएंगे.

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