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Begusarai News: स्कूल के सारे शिक्षक हुए फरार, बिहार में ये क्या हो रहा है…

Begusarai News: बिहार के बेगूसराय में स्कूल में हादसे के चलते बच्चे की मौत हो गई. उधर, कार्रवाई के डर से शिक्षक फरार हो गए.

By: JP Yadav | Last Updated: May 6, 2026 11:01:17 PM IST



Begusarai News: बिहार के बेगूसराय से जिला प्रशासन एवं विद्यालय की लापरवाही साफ सामने आ रही है. यहां पर लापरवाही की वजह से बुधवार (06 मई, 2026) को एक छात्र की मौत हो गई.  पूरा मामला बछवाड़ा थाना क्षेत्र के राजकीय कृत मध्य विद्यालय जहानपुर का है.  मृतक छात्र की पहचान जहानपुर निवासी मुन्ना कुमार के रूप में हुई है. इसके बाद स्कूल के सारे शिक्षक फरार हो गए.  बताया जा रहा है कि मुन्ना कुमार आठवीं वर्ग का छात्र था. बुधवार को अन्य दिन तरह वह विद्यालय पहुंचा था. जैसे ही वह क्लास रूम पहुंचा उसके सिर के ऊपर लोहे  के सरिया का बंडल गिर गया, इससे विद्यालय में ही उसकी मौत हो गई.

गुस्साए ग्राणीण, किया हंगामा 

मुन्ना कुमार की मौत के बाद आक्रोशित लोगों ने विद्यालय के शिक्षकों को बंधक बना लिया. इसके बाद मंसूरचक बाछवाड़ा पथ को जामकर हंगामा शुरू कर दिया. सूचनापर मौके पर तेघरा के एसडीओ राकेश कुमार डीएसपी कृष्ण कुमार सहित कई बडीय पदाधिकारी पहुंचे और लोगों को शांत करने की कोशिश की. वहीं, लोगों का कहना है कि सभी शिक्षकों पर हत्या का मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाए. देखा जाए तो सरिया के कचरे को क्लास रूम में बांधकर रखना भी कहीं ना कहीं बड़ी लापरवाही है जो छात्र की मौत की वजह बनी है.  बताया जा रहा है कि कार्रवाई और लोगों की नाराजगी के डर से सभी शिक्षक फरार हो गए हैं.

छात्रों की पिटाई गलत!

पढ़ाई अथवा शरारत करने पर शिक्षकों द्वारा छात्र-छात्राओं की पिटाई के मामले अक्सर सामने आते हैं. बावजूद इसके छात्रों को पीटना गलत परंपरा है. मनोवैज्ञानिक की भी मानें तो छात्रों की पिटाई से उनके मन पर गलत प्रभाव पड़ता है. इससे छात्रों का विकास भी प्रभावित होता है.   बाल मनोविज्ञान और कानूनविद् भी मानते हैं कि पिटाई बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए हानिकारक है. विदेश में नार्वे समेत ज्यादातर देशों में बच्चों के साथ छात्रों की पिटाई भी प्रतिबंधित है.

भारत की बात करें तो यहां पर स्कूलों में छात्रों की पिटाई यानी शारीरिक दंड (Corporal Punishment) न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि कानूनी रूप से पूरी तरह रोक  है  भारतीय कानून के तहत छात्रों को शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना देना एक दंडनीय अपराध है. शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009 में धारा 17(1) किसी भी प्रकार के शारीरिक दंड या मानसिक उत्पीड़न प्रतिबंधित है. इसकी धारा 75 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बच्चे के साथ क्रूरता करता है, तो उसे 3 साल तक की जेल हो सकती है.

रिपोर्टर: रवि शंकर शर्मा

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