सहरसा. बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र इंडिया न्यूज के खास शो ‘चुनावी चौराहा’ की टीम सहरसा पहुंची. सहरसा के लोगों का कहना कि यहां फैक्टरियों की कमी, मजदूरों को मजदूरी नहीं मिलती, रेलवे कंसट्रक्शन की वजह से समस्याएं भरी पड़ी और कोसी तटबंध में पानी नहीं है.

कभी मछली और मयखाने के लिए जाना जाने वाला सहरसा अब गरीबी और भुखमरी का पर्याय बन चुका है. यहां से ज्यादातर बिहार के लोग रोजगार के लिए पलायन कर चुके हैं. 

सहरसा की सियासत

सहरसा विधानसभा सीट पर 2005 और 2010 के चुनावों में बीजेपी ने कब्जा किया था. 2010 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के आलोक रंजन ने आरजेडी के अरूण कुमार को हराया था. इस बार इस सीट पर करीब सवा 3 लाख मतदाता उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे. बता दें कि सहरसा में आखिरी चरण में 5 नवंबर को चुनाव होना है. 

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