नई दिल्ली. विश्वामित्र जी उन्हीं गाधि के पुत्र थे. वे अपने समय के वीर और ख्यातिप्राप्त राजाओं में गिने जाते थे. शाप के कारण त्रिशंकु चाण्डाल बन गये तथा उनके मन्त्री तथा दरबारी उनका साथ छोड़कर चले गये. फिर भी उन्होंने सशरीर स्वर्ग जाने की इच्छा का परित्याग नहीं किया. वे विश्वामित्र के पास जाकर बोले अपनी इच्छा को पूर्ण करने का अनुरोध किया.
 
विश्वामित्र ने कहा तुम मेरी शरण में आये हो. मैं तुम्हारी इच्छा अवश्य पूर्ण करूंगा और तब विश्वामित्र ने स्वर्ग का निर्माण शुरू किया . विश्वामित्र की पूरी कहानी को विस्तार पूर्वक बताएंगे अध्यात्मिक गुर पवन सिन्हा इंडिया न्यूज के शो भारत पर्व में.
 

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