नई दिल्ली: मथुरा की ‘मेमोरी गर्ल’ प्रेरणा शर्मा ने एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड के बाद एक बार फिर मेमोरी का करिश्मा दिखाते हुए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है. एक मिनट के अंदर 100 अंकों को मेमोरी में फिक्स करके यह करिश्मा किया है.
 
 
मथुरा रहने वाली प्रेरणा ने यूएसए का रिकॉर्ड तोड़ते हुए अपना नाम गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराया है. महज 8 मिनिट 33 सेकिण्ड में 500 संख्या याद कर ये रिकॉर्ड भारत के नाम दर्ज हुआ है. मैमोरी में गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज कराने वाली प्रेरणा पहली लड़की है जिसने भारत को ये सम्मान दिलाया है.
 
 
प्रेरणा अब और भी रिकॉर्ड भारत को दिलाना चाहती है. मेमोरी गर्ल प्रेरणा शर्मा ने एशिया बुक और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड के बाद एक बार फिर मेमोरी का करिश्मा दिखाते हुए गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए परीक्षा दी. इस दौरान उन्होंने आठ मिनट 33 सेकेंड में 500 अंकों को याद कर सैकड़ों छात्रों के सामने सुनाया. जबकि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में अब तक 300 से अधिक अंकों का रिकॉर्ड यूएसए के लेंस शिरहार्ट के नाम दर्ज है. 
 
 
सौंख रोड स्थित पद्मपुरी कालोनी निवासी प्रेरणा ने महज 19 वर्ष की आयु में यह करिश्मा कर दिखाया है. वर्तमान में वह बीएसए कॉलेज में बीएससी की शिक्षा ग्रहण कर रही हैं. 11 जुलाई 2016 को प्रेरणा ने अपनी मेमोरी के बल पर वियतनाम के युवक का रिकॉर्ड तोड़ते हुए एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया था. उसके बाद अगस्त में प्रेरणा लिम्का गर्ल बन गईं.
 
बुधवार को प्रेरणा ने गिनीज बुक में रिकॉर्ड बनाने के लिए परीक्षा दी है. इसमें पीपीटी के माध्यम से 500 अंक लिखे गए. प्रेरणा ने आठ मिनट 33 सेकेंड में इन अंकों को अपनी मेमोरी में दर्ज कर लिया. इसके बाद अंक का बोर्ड हटा लिया गया. सैकड़ों छात्रों के सामने प्रेरणा ने इन अंकों को इनके सही क्रम में ही सुना डाला. इस प्रजेंटेशन की सीडी गिनीज बुक को भेजी गई है.
 
 
इस दौरान डीजीसी चंद्रमोहन अग्रवाल, नायब तहसीलदार छाता दुर्गेश, सांसद प्रतिनिधि जनार्दन शर्मा, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड मेमोरी हेड दिनेशधर द्विवेदी, शिवकुमार यादव, जेपी सिंह, हिमानी, बीएसए कॉलेज से बबीता, भावना, मधुबाला, शुभांगी तिवारी, आदित्य तिवारी, कार्यक्रम कोआर्डिनेटर अवनीश शर्र्मा, फैजुल हसन आदि मौजूद रहे.
 
बता दें कि अपनी सफलता का श्रेय प्रेरणा अपनी मां को देती हैं. ट्यूशन करके घर और अपना गुजारा करने वाली प्रेरणा के सिर पर पिता का भी हाथ नहीं है. न ही नाते-रिश्तेदारों का कोई सपोर्ट है. प्रेरणा को मिली सफलता से प्रेरणा की मां बेहद खुश हैं.

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