नई दिल्ली. एक ऐसी लड़की की कहानी जिसने अपनी कड़ी मेहनत से ‘हॉकी की रानी’ बन गई है. पिता घोड़ा गाड़ी चलाते थे, तीन बच्चों के परिवार का लालन पालन जैसे तैसे हो रहा था. इसी बीच पांच साल की बेटी ने जिद पकड़ लिया कि वो हॉकी खेलेगी.अपनी रानी बेटी की इस जिद को पूरा करने के लिए एक पिता ने जान लगा दी.
 
बाप-बेटी की इस जीद से ही बेटी आज हिन्दुस्तान में हॉकी की रानी कहलाती है. इंडिया न्यूज शो बेटियां में आज हम हिन्दुस्तान की रानी बेटी के संघर्ष की कहानी लेकर आए है. ये कहानी एक परिवार के त्याग की है. ये कहानी एक बेटी के संघर्ष की है. और ये कहानी हर उन लोगों की सीख के लिए है. जो हार के लिए हालात को जिम्मेदार ठहराते है.
 
 ‘हॉकी की रानी’ की पूरी कहानी
कुरुक्षेत्र के छोटे से कसबे शाहाबाद की रानी रामपाल ने महिला हाकी के क्षेत्र में अपनी लगन और जिद के बूते पर ऊंचा मुकाम हासिल किया है खिलाडी रानी के पिता रामपाल जोकि आज भी मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पोषण कर रहे है ने जब अतीत में झांका और किस तरह रानी की जिद और जनून के करण उन्हें झुकना पड़ा और हाकी खेलने दिया हालांकि घर में घड़ी नहीं थी और रानी रात को उठ जाती थी कि उसे ग्राउंड पहुंचना है. 
 
कमोबेश यही यादे रानी की माता के जेहन में भी थी शुरू में परिवार समाज का भय था कि लड़की को हाकी खिलाओगे वही उसे देने के डाईट भी नहीं थी लेकिन जेसे तेसे समय निकल गया रानी की माता को मलाल है की हरियाणा सरकार ने रानी के लिए कुछ नहीं सोचा और नोकरी तक उसे पंजाब में करनी पड़ रही है.
 
भारतीय महिला हॉकी इतिहास में महिला हॉकी टीम ने इस बार कामयाबी का वो परचम फहराया है जिसे देश सालो साल याद रखेगा. महिला हॉकी टीम ने 36 साल बाद एक बार फिर ओलम्पिक के लिए क्वालिफाई किया है. देश  के लिए भले ही ये गर्व की बात हो लेकिन बात अगर इन खिलाड़ियों के घर परिवार की कि जाये तो यकीन करना मुश्किल हो जाता है की बिना किसी मदद के आखिर कैसे ये खिलाड़ी इस मुकाम तक पहुंच पाए देखिए सिर्फ इंडिया न्यूज पर
 

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