नई दिल्ली. इंडिया न्यूज़ के इस खास कार्यक्रम में आज हिन्दुस्तान की किसी एक बेटी की नहीं बल्कि उन हज़ारों बेटियों की बात करेंगे.जिनकी पहचान ही अलग है, जिनके हाथों में चुड़ियां नहीं खतरनाक हथियार होते हैं. जिनका दिन सरहद पर निकलता है और रात भी सरहद पर होती है.
 
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वो हिन्दुस्तान की हिफाज़त के लिए अपनी जान दांव पर लगा देती हैं.तो आईये देखते हैं हिन्दुस्तान की इन जांबाज बेटियों की दास्तान इंडिया न्यूज शो ‘बेटियां’ में.
 
इस कड़ी ट्रेनिंग के बाद ITBP की महिला कमांडोज को सीधे सीमा की सुरक्षा के लिए भेज दिया जाता है. देश की बेटियां कैसे सीमा पर दुश्मन की हर चाल को नाकाम करने के लिए चौबीसो घंटे तैयार रहती हैं. कैसे ये 11 हजार फीट की ऊंचाई पर मुल्क की सुरक्षा करती हैं.
 
हिंदुस्तान की हिफाजत में भारत की बेटियां आईटीबीपी ही नहीं सीआरपीएफ में भी अहम भूमिका निभा रही हैं. अब आप उन्हीं बेटियों से मिलेंगे जो खतरनाक नक्सलियों से लोहा लेती हैं. नक्सलियों को उन्हीं के गढ़ में घुसकर खत्म करती हैं.
 
अब ITBP की महिला विंग की सरहदों पर तैनाती होगी. 44 हफ्तों की होती है ITBP में स्किूटों की ट्रेनिंग, पुरुषों की ही तरह होती है इन महिलाओं की ट्रेनिंग. महिलाओं को भी पुरुषों की ही तरह कॉम्बैट ट्रेनिंग दी जाती है. 8 से 10 हज़ार फीट की ऊंचाई पर ITBP में शामिल महिलाएं रोज़ाना 9 घंटे तक प्रैक्टिस करती हैं.
 
आईटीबीपी ने 3488 किलोमीटर लंबी चीन सीमा के साथ पुरुष जवानों की तरह चौकियों में महिला जवान तैनात करने के लिए करीब बीस अग्रिम चौकियां चिन्हित की हैं. लगभग पांच सौ महिलाओं को इसके लिए चयनित कर प्रशिक्षण दिया गया है.
 
 

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