नई दिल्ली. पूरे बनारस में तारावती इकलौती ऐसी महिला हैं जिनके हवाले है एक पूरा पुलिस थाना. दिन हो या रात जब भी कोई वारदात होती है तारावती वहां फौरन पहुंच जाती हैं और तब तक दम नहीं लेती जब तक मुजरिम सलाखों के पीछे न पहुंच जाए.
 
बता दें कि फर्ज की राह पर चलते हुए पति सीने पर गोली खाकर शहीद हो गए. पीछे छोड़ गए दो मासूम बच्चे और एक मजबूर बीवी जिसके नाजुक कंधे पर थी पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी पर तारावती ने जिस तरह चुनौतियों के पहाड़ को पस्त किया उस पर पूरे पुलिस महकमे को नाज है.
 
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तारावती के थाना अध्यक्ष बनने के बाद शिवपुर इलाके में न सिर्फ क्राइम कम हुआ है बल्कि आम लोग भी अब खुद को ज्यादा सुरक्षित मानने लगे हैं. खासकर महिलाओं के मन में तारावती को लेकर इतना ज्यादा भरोसा है कि वो कभी भी किसी भी वक्त बेहिचक अपनी शिकायत लेकर इस लेडी सिंघम के पास पहुंच जाते हैं.
 
तारावती कैसे बनी लेडी सिंघम
 
आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस लेडी इंस्पेक्टर के नाम से ही अपराधियों में दहशत फैल जाती है.उसकी जिंदगी महज कुछ साल पहले तक घर की चारदीवारी के बीच सिमटी हुई थी. पति और बच्चों की देखभाल करना ही उसकी दिनचर्या थी. पुलिस की वर्दी तो दूर वो कानून के जाल से भी पूरी तरह अनजान थी  पर एक दिन उसकी जिंदगी में ऐसा भूचाल आया जिसने उसके सारे अरमान तहस नहस कर डाले.
 
16 सितंबर 2006 की तारीख तारावती के जहन में आज भी ताजा है.आज जो वर्दी तारावती की सबसे बड़ी पहचान है.दस साल पहले तक यही वर्दी उनके पति रामराज यादव की सबसे बड़ी शान थी लेकिन एक खूनी वारदात ने तारावती की दुनिया हमेशा के लिए वीरान कर दी. तब रामराज यादव फर्रुखाबाद में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे. खबर मिली कि कुख्यात कलुआ गिरोह के अपराधी उनके इलाके में घूम रहे हैं. रामराज बिना वक्त गंवाए फौरन गुंडों से मुकाबला करने मौके पर पहुंच गए लेकिन मुठभेड़ के दौरान वो अपराधियों की गोली का निशाना बन गए.
 
 

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