नई दिल्ली. पत्नी पर पति के अत्याचार की खबरें आपने बहुत पढ़ी और देखी होंगी. ऐसे मामलों में कोर्ट के सख्त फैसले भी आपने सुने होंगे लेकिन पारिवारिक बिखराव के लिए हर बार पति ही जिम्मेदार हो, ऐसा जरूरी नहीं है. कर्नाटक के एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.
 
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सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि पत्नी अगर पति को मां-बाप से अलग होने के लिए बार-बार मजबूर करे  तो इसे पत्नी की निर्दयता माना जाएगा. पत्नी अगर बार-बार पति को खुदखुशी की धमकी दे तो भी इसे पत्नी की निर्दयता माना जायेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पत्नी की निर्दयता के आधार पर पीड़ित पति तलाक पाने का हकदार होगा.
 
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक HC के फैसले को पलटकर पीड़ित पति को तलाक की इजाजत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने तलाक के 20 साल पुराने मामले में पति के पक्ष में ये ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.सुप्रीम कोर्ट के फैसले भविष्य में आने वाले मामलों के लिए आधार बनते हैं और इस फैसले के आधार पर भी, भविष्य में कई मामलों में इंसाफ हो सकता है.
 
बड़ा सवाल ये है कि क्या सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला हमारी बदलते और बिखरते सामाजिक मूल्यों पर बड़ी चोट नहीं है ?
 

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