नई दिल्ली. 2014 के विधानसभा चुनाव में लगे सदमे के बाद राज ठाकरे फिर से अपने पुराने फॉर्म में आ गए हैं. बुधवार को अपनी पार्टी के एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं को सीधे आदेश दिया कि उत्तर भारतीयों के ऑटो रिक्शे को आग लगा दो.
 
बीते एक दशक से ज्यादा वक्त से राज ठाकरे नफरत की ऐसी ही सियासत के बूते अपनी राजनीति को अर्श पर पहुंचाने की कोशिश में हैं. लेकिन पिछले चुनावों में महाराष्ट्र की जनता ने उन्हें सीधे तौर पर खारिज कर दिया फिर भी आदत से मजबूर राज ठाकरे हैं कि मानते नहीं. 
 
अब सवाल उठता है कि उन्हें कब तक और क्यों बर्दाश्त किया जाए ? आखिर कानून के सामने ऐसी क्या मजबूरी है कि राज ठाकरे जैसे लोग नेतागीरी की आड़ में अपराधियों की तरह बर्ताव करने को आजाद हैं.
 
इंडिया न्यूज के खास शो ‘बीच बहस’ में इन्हीं सवालों पर होगी आज चर्चा.
 
 
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