नई दिल्ली. देश में बढते सांप्रदायिक तनाव और कन्नड़ साहित्यकार एमएम कुलबर्गी की हत्या के विरोध में साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने वाले नाराज़ साहित्यकारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. अब तक करीब 40 से ज्यादा साहित्यकार अपने पुरस्कार लौटा चुके हैं.

साहित्य अकादमी को पता ही नहीं कि वापस पुरस्कारों का क्या करें !

साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने का ये सिलसिला साहित्यकार उदय प्रकाश ने शुरू किया था. उनके बाद नयनतारा सहगल और सहगल के बाद कई और साहित्याकारों ने बारी-बारी से अपने पुरस्कार लौटा दिए.

इन कारणों से साहित्यकारों में है नाराजगी?

कन्नड़ साहित्यकार और चिंतक एमएम कुलबर्गी की 30 अगस्त को कर्नाटक में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. कुलबर्गी धार्मिक कर्मकांड और मूर्ति पूजा के विरोधी थे. इससे पहले फरवरी में वामपंथी विचारक गोविंद पानसरे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. पानसरे ने महाराष्ट्र में टोल नाके के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया था. 28 सितंबर को उत्तर प्रदेश के दादरी में 52 साल के अखलाक की गोमांस की अफवाह के बाद हत्या कर दी गई थी.

साहित्य अकादमी ने लेखकों से कहा, हम आपके साथ पर आप पुरस्कार वापस लें

कई साहित्यकारों को इन मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी भी नागवार लगी. उसके बाद से ही साहित्यकार अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा रहे हैं. ऐसे में अब कई सवाल उठने लगे हैं कि देश के साहित्यकारों का सरकार से टकराव क्यों है? क्या मौजूदा व्यवस्था में पाबंदी बढ़ रही है ? क्या देश में लिखने और बोलने के खिलाफ माहौल बन रहा है ?

देखिए अर्ध सत्य का पूरा शो:

Leave a Reply

Your email address will not be published.

देश और दुनिया की ताजातरीन खबरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक,गूगल प्लस, ट्विटर पर और डाउनलोड करें Inkhabar Android Hindi News App