नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संघ और बीजेपी दोनों के लिए संभावनाओं के नेता हैं. हिंदुत्व की राजनीति के अगले झंडावरदार है और सत्ता से लोगों की जो उम्मीदें होती हैं. उसके इतर, सत्ता से जुड़ाव के सामाजिक और धार्मिक कारणों के टूल यानी उपकरण हैं. ये बात मैं यू हीं नहीं कर रहा बल्कि जिस तरीके से केरल से गुजरात तक योगी को सड़कों पर उतारा जा रहा है और उत्तर प्रदेश में दिवाली के मौके पर अयोध्या के भीतर जिस ऐतिहासिक आयोजन की तैयारी है, ये सब बहुत कुछ कह रहे हैं. कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी की डिलिवरी और क्रेडिविलिटी और दूसरी तरफ योगी की धर्मयात्राओं, धर्म उत्सवों और हिंदुवादी सत्ता के बीच संघ और बीजेपी सत्ता को बचाए और बनाए रखने की एक नई रणनीति तैयार कर चुकी है.
 

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