नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल जल रहा है और ये आग दार्जिलिंग वाली नहीं है बल्कि 24 परगनावाली है जिसके लपेटे में राज्य के दूसरे हिस्से तेजी से आ रहे हैं. मारपीट, आगज़नी, तोड़फोड़, बलवा-बवाल सब चल रहा है. हम चीन से टकराव में, लालू प्रसाद यादव के यहां हुई छापेमारियों में, कश्मीर के हालात में फंसे जरुर हैं लेकिन इन सबसे कहीं ज्यादा गंभीर और भयावह स्थिति पश्चिम बंगाल में दिख रही है.  
 
बंगाल के बशीरहाट में एक खास समुदाय एक बच्चे को उसके हवाले करने की मांग कर रहा है. वो समुदाय अपने मुताबिक उसकी सजा तय करना चाहता है. कहा ये जा रहा है कि जिस लड़के को भीड़ के हवाले करने की मांग की जा रही है और ऐसा नहीं होने पर हिंसा और आगजनी का नंगा खेल चल रहा है.
 
दरअसल लड़के ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली थी जिसमें उसने मोहम्मद साहब के बारे में कुछ आपत्तिजनक बातें लिखी थीं. लेकिन दूसरी तरफ से यह कहा जा रहा है कि सच कुछ और है और उसे जाने समझे बिना ही लड़के की जान को आफत में डाल दिया गया है. 
 
 
भीड़ का गुस्सा पुलिस प्रशासन पर भारी पड़ रहा है, पश्चिम बंगाल में मुगलिस्तान की मांग उठ रही है और शऱिया कानून के तहत उस लड़के की सजा तय करने के लिये लोग सनके जा रहे हैं. नतीजा ये है कि दूसरी तरफ से भी लोग खड़े हो गए हैं. इस सनकी हुई भीड़ में अगर कुछ संकट में है तो इंसानियत, कानून, औऱ इस देश की गंगा-जमनी तहजीब. मौका अगर मिला है तो सियासत को. समाज में कौम का तंदूर गरम है, रोटियां सेंक ली जाएं तो अच्छा और यही हो रहा है. 
 
अब सवाल ये है कि बशीरहाट का सच क्या है. आखिर ऐसा क्या और कब हुआ कि बशीरहाट की आग पूरे पश्चिम बंगाल को अपनी चपेट में लिए जा रही है. क्यों ममता बनर्जी पर एक कौम के हक में एक कौम के खिलाफ ज्यादती जुल्म का आरोप लग रहा है. क्यों राज्यपाल और ममता में जंग छिड़ी हुई है औऱ क्यों ममता कह रही हैं कि बीजेपी आग में घी डालने का काम कर रही है. सियासी रोटी पका रही है.
 
 
बशीरहाट में भीड़ घंटो तोड़-फोड़ करती रही, बवाल चलता रहा, कुछ लोगों को निशाना बनाया जाता रहा और पुलिस प्रशासन ऊपर से आदेश का इंतजार करता रहा. मतलब उपद्रवी और आग लगाने वाली भीड़ को उन्होंने शुरूआत में ही नहीं रोका. बल्कि एक तरह से उन्हें खुली छूट दी. उन्हें इतना समय दिया कि वो आगे बढ़ते चले गए.
 
भीड़ ने पुलिस से मांग की है कि वब हर हाल में लड़के को सौंप दिया जाए जो तर्क दिया गया उसमें ये कहा गया कि भारत का कानून इस लड़के को ऐसी जुर्म के लिए फांसी नहीं दे सकता. लिहाजा भीड़ शरिया कानून के तहत उसे फांसी देगी.
 
पैगम्बर मोहम्मद जिन्हें आप अल्लाह की तरफ से धरती पर भेजे गए नबी कह लें, रसलू कह लें या पैगम्बर कह लें. वे जब चालीस साल के थे तो ईश्वर की तरफ से जो संदेश नाजिल हुए. वो कुरान है और कुरान के इहलाम के बाद यानी 40 साल की उम्र से पर्दा करने तक मोहम्मद साहब ने जो किया कहा उसको हदीस कहा जाता है. 
 
 
किसी भी आलिम ने अगर हदीस पढी हो तो उसको अंदाजा होगा कि पैगम्बर  मोहम्मद का जीवन-इंसानियत, ईमान और रहम के चिरागों से रौशन रहा.  जब हजरत मोहम्मद साहब ने इस्लाम का प्रचार शुरू किया तो कुछ लोगों ने उन पर तरह-तरह से अत्याचार किए. मक्का में कुछ कबीलों ने तो उन्हें अपना दुश्मन मान लिया और कुरैश कबीले में मुहम्मद साहब पर पत्थर बरसाए जाने लगे.
 
कुछ लोग तो उन पर कूड़ा फेंक देते थे लेकिन मुहम्मद साहब का दिल इतना बड़ा था या कह लीजिए कि सचमुच उनमें सहने की ऐसी ताकत थी उन्होंने ऐसे सिरफिरों को एक शब्द तक नहीं कहा. चुपचाप अपना काम करते चले गए- उस इस्लाम को फैलाया- बढ़ाया जो दुनिया का आधुनिक और तरक्कीपसंद मजहब माना जाता है. लेकिन उन्हीं मोहम्मद साहब के नाम पर खून-खराबे, हैवानियत और जाहिलपन का जहर जो लोग बोते हैं उनको हम इस्लाम के झंडाबरदार कैसे कह सकते हैं.
 
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