नई दिल्ली: चैंपिय़ंस ट्राफी में पाकिस्तान के साथ टीम इंडिया के मुकाबले शुरू और रविवार को दोपहर ढाई तीन बजे से लेकर रात 10.30- 11 बजे तक सारा देश टीवी से चिपका रहेंगे. ऐसा ही सीमा के पार भी होता है, पाकिस्तान में. वैसे इंडिया-पाकिस्तान के क्रिकेट मैच हो तो तनाव सातवें आसमान पर होता है. 
 
दोनो देशों के बीच यह मैच नहीं होता बल्कि जंग होती है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के मुखिया शहरयार खान ने पाक टीम को समझाया है कि देखो भई दबाव में नहीं खेलना है. फ्री होकर खेलो –मैच इंडिया से है. शहरयार खान चाहे जो समझाएं लेकिन पाकिस्तानी टीम के चेहरे औऱ उनके हावभाव से तनाव साफ नजर आ रहा है.
 
 
विराट कोहली की टीम से टकराना है और उधर देश में 18 करोड़ लोग इस बात के लिए चढे पड़े रहते हैं कि जीतना जरुरी है. ऐसे में पाकिस्तानी टीम का ब्लड प्रेशर बढ ही जाता है. टीम इंडिया प्रैक्टिस के दौरान कोई चूक-सुस्ती नहीं है, लेकिन दिमाग में कोई तनाव-दबाव भी नहीं. 
 
दरअसल हुआ ये कि पिछले 15-20 साल में हिंदुस्तान में क्रिकेट का बुनियादी ढांचा और खिलाड़ियों को तराशने संवारने का सिस्टम मजबूत हुआ है, टेक्नीकली शॉर्प और फिजिकली फिट क्रिकेटर्स की तेज तर्रार फौज हिंदुस्तान में तैयार हुई. इसके लिए थोड़ा बहुत क्रेडिट आप आईपीएल को भी दे सकते हैं. लेकिन उधर पाकिस्तान में इसके ठीक उलट होता चला गया.
 
 
पीसीबी विवादों का शिकार हुआ, तंगहाली बढ़ती गई, क्रिकेट का बुनियादी ढांचा टूटता गया. क्रिकेटरों को तलाशने, तराशने का काम नजरअंदाज होता गया और आज हालत ये है कि पूरी पाकिस्तानी टीम में तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर को छोड़ दें तो दुनिया में जाना जाने वाला पाकिस्तान का कोई दूसरा क्रिकेटर उनकी टीम में नहीं है. 
 
 
समझ तो गए होंगे कि क्या हाल है पाकिस्तान में. एक छोटी सी बात आपको बता दूं कि अभी जो पाकिस्तानी टीम है उसमें एक भी खिलाड़ी ग्रेजुएट नहीं है. हालांकि ये कोई बहुत बड़ी बात नहीं है लेकिन किसी से भी बात कीजिए वो बात भी सलीके से नहीं कर सकता और मौजूदा दौर में जब क्रिकेट खिलाड़ी की शॉर्पनेस और साइकॉलजी READ करने दोनों का गेम है.
 
 
दबाव की वजह खिलाड़ियों की कमजोर क्वालिटी तो है ही लेकिन पाकिस्तान के अंदर जिस तरह का उन्माद पैदा होता है और भारत से हारने पर जिस तरीके से टीवी तोड़े जाते हैं. मातम मनाया जाता है और खिलाड़ियों तक को मारने पर लोग आमादा हो जाते हैं, वो पूरी टीम को ज्यादा दबाव में लाता है.
 
इसके उलट हिंदुस्तान के क्रिकेट लवर्स हैं जो पाकिस्तान से मैच हारने पर तकलीफ में तो आते हैं, पूरी रात सो नहीं पाते हैं लेकिन टीम और अपने खिलाड़ियों की उतनी ही इज्जत करते हैं. टीम इंडिया के कान्फिडेंस और क्वालिटी में जो निखार आया है उसमें देश के माहौल का भी बड़ा रोल है.
 
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