नई दिल्ली: एक राक्षस था रक्तबीज. दानवराज शुम्भ निशुम्भ का सेनापति. वो मर ही नहीं रहा था क्योंकि उसको वरदान था कि जब भी कोई उसको मारेगा उसके खून के हर बूंद से एक एक रक्तबीज एक जैसे पैदा हो जाएंगे. जब कुछ समझ नहीं आया तो शक्ति को काली रुप धऱना पड़ा. उसका सिर काटकर खप्पर में रख दिया और खून पीती चली गई बिना एक बूंद नीचे गिराए.
 
ये पौराणिक कहानियां है जिनका सांकेतिक महत्व होता है. हमारे देश में भ्रष्टाटार का जो राक्षस है वह रक्तबीज ही है. एक को पकड़ो तो कई और निकल आते हैं. मैं यह मुद्दा इसलिए लेकर आया हूं कि आज देश का प्रधानमंत्री और यूपी जैसे राज्य का मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार को विकास का सबसे बड़ा रोड़ा मान रहे हैं औऱ खत्म करने के दावे बार बार कर रहे हैं.
 
इन दोनों बयानों के पीछे क्या नीयत ठीक है यह जानना भी जरुरी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने ही प्रदेश के एक सरकारी स्कूल पहुंचे. उन्होंने बच्चों से पूछा कि आपको ड्रेस मिलती है कि नहीं, किताबें मिलती हैं कि नहीं. मिड डे मिल में क्या मिलता है ? मतलब जो सुविधाएं सालों से सरकारें देती आई हैं उन्ही के बारे में योगी पूछ रहे हैं.
 
योगी का ये छापा अचानक नहीं था. अधिकारियों को मालूम था कि वो स्कूल में भी आएंगे. लिहाजा चीजें बहुत हद तक सुधार दी गई होंगी. ये समझा जा सकता है. जब सरकारें करोड़ों-अरबों का बजट इस नाम पर देती हैं फिर भी सरकारी स्कूलों में फटेहाली-बदहाली क्यों हैं और दूसरी तरफ कुछ लोगों के घर में संगमरमर कैसे लगते जा रहे हैं. 
 
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