नई दिल्ली: देश के 5 राज्यों से जो जनादेश आया है वो प्रचंड है, ऐतिहासिक है, उम्मीदों से कहीं आगे है. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी की सुनामी सी आई है. इस महाजीत ने दिल्ली और बिहार की हार के बाद कमजोर पड़े और कई सवालों में आए मोदी ब्रांड को फिर से मजबूत और चट्टानी बना दिया है जिसने राहुल गांधी, अखिलेश यादव और मायावती को ध्वस्त कर दिया है.
 
 
इन चुनाव में जातियों की गोलबंदी को फिर से तोड़ा है और विकास-बेहतरी के वादे पर लोगों के यकीन को ताकतवर किया है. शायद इसीलिए उमर अबदुल्ला जो जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री हैं, उन्होंने कहा है कि मोदी का मुकाबला करने वाला नेता नहीं है और 2019 नहीं 2024 की तैयारी कीजिए.
 
 
जो कहा था वही हुआ. उत्तर प्रदेश के इतिहास में बीजेपी इतनी बड़ी जीत कभी नहीं हुई. कोई कोना नहीं छूटा. मेरठ , लखनऊ, बनारस, इलाहाबाद, कानपुर, आगरा, बरेली, झांसी हर तरफ केसरिया होली हो रही है. मोदी ही मोदी छाए हुए हैं. उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कुल 23 सभाएं की. वो 17 ज़िलों में गए. 11 जिलों में उन्होंने एक-एक सभाएं कीं. वहीं छह ज़िलों में उन्होंने दो-दो चुनावी सभा को संबोधित किया.
 
 
कुल मिलाकर यूपी की 403 विधानसभा सीटों में 243 सीटों के वोटरों तक पीएम खुद पहुंचे. पीएम की एक-एक रैली का खांका इस तरह से खींचा गया था कि औसतन एक रैली में 8 से 10 विधानसभा की सीटें कवर हो जाएं. इस तरह से कुल सीटें होती हैं 243. अब रिजल्ट देखिए. जिन 243 में से करीब 213 सीटें बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियों के पाले में गई. ये किसी भी राज्य के चुनाव प्रचार में किसी प्रधानमंत्री की तरफ से जीत का सबसे बेहतर स्ट्राइक रेट है. 
 
 
नतीजे बता रहे हैं कि प्रधानमंत्री ने यूपी में चुनाव प्रचार के दौरान जो-जो कहा वही हुआ. भ्रष्टाचार और कुशासन पर हमला किया. यूपी की जनता से गठबंधन कर धोखा बताया. यूपी में विकास ठप है इसे समझाया. बीजेपी आई तो तस्वीर कैसे बदलेगी ये बताया. गरीबों का भला कैसे करेंगे ये भी समझाया. 
 
 
यूपी चुनाव के दौरान अपनी 23 में से करीब 19 रैलियों में मोदी ने इस मुद्दे को लेकर अखिलेश-राहुल गठबंधन के साथ मायावती को भी घेरा. पीएम ने लोगों को समझाया कि कैसे यूपी में हर पांच साल पर कहने के लिए सरकार बदलती है लेकिन लूट-खसोट चलते रहते हैं.
 
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