नई दिल्ली : मोदी सरकार के नोटबंदी के बाद से ATM, बैंक कैसे सेंटर में आ गए हैं और हिन्दुस्तान में हर दूसरा आदमी इन दिनों इसी की चर्चा करता नजर आता है. किसान, स्टूडेंट, छोटे कारोबारी, मंडी व्यापारी, बड़े व्यापारी, शो-रूम, सोना कारोबारी, नेता-समर्थक-वोटर, भक्त, अंधभक्त सब के सब. लेकिन ऐसा क्या हो गया इस बैंक में खेत की बुआई रुक गई, ऐसा क्या हुआ की छात्रों की पढ़ाई रुकने लगी है, छोटे कारोबारियों का दम निकल रहा है, मंडी में हड़कंप मचा है, बड़े व्यापारी त्राहिमाम हैं, शो-रूम वाले भी परेशान हैं.
 
सोना कारोबारी 15 दिनों से दुकानें बंद कर गायब हैं. नेता बयान पर बयान दिए जा रहे हैं. समर्थक बंटे हुए हैं. वोटर पर असर की परीक्षा होनी है. सोशल साइट्स पर भक्त और अंधभक्त की कैटगरी हो रखी है. समस्याओं सैकड़ों हैं. वजह है नोट, पैसा. क्या सचमुच नोटबंदी से पूरा हिन्दुस्तान त्राहिमाम है. क्या सचमुच बीजेपी के नेताओं ने नोटबंदी को पहले से भांप लिया था और नोटबंदी से कुछ दिनों पहले ही कई जिलों में शहरों में बीजेपी ने जमीनें खरीद ली. क्या नोटबंदी के विकास का पहिया रुक सकता है और इन सबसे बड़ा सवाल क्या सचमुच ATM/बैंक में भरपूर तादात में नोट पहुंचने में 7 महीने का समय लग सकता है. या ये सब अफवाह हैं.
 
मतलब नोट नहीं होने से किसानों के लिए मिट्टी का मोल कम हो रहा है और अगले कुछ दिनों में अगर कैश की किल्लत बनी रही तो सोना उगलने वाली मिट्टी सचमुच में माटी बनकर न रह जाए. क्योंकि गेहूं की बुआई अगर 30 नवंबर के बाद होती है तो फिर फसल भगवान भरोसे है और नोटबंदी के बाद कई किसान ऐसे हैं जिनके सामने ये नौबत है कि वो बुआई तब तक टालें जब तक जुताई, बीज और खाद के पुख्ता इंतजाम न कर लें, लेकिन ख़तरा सिर्फ गेहूं की बुआई के साथ नहीं. जरा गेहूं से इतर दूसरे फसलों पर भी है.
 
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