नई दिल्ली. देश के अलग अलग शहरों में नोट की जो जंग है वो कमोबेश एक ही हो गई है. अपनी जरुरतों के लिये पैसे की तंगी झेलते लोग, पैसे के लिए एटीएम के सामने और बैंक में घंटों लाइन में धक्के खाते लोग. 8 नवंबर की रात 500-1000 के पुराने नोट के रद्दी हो जाने के प्रधानमंत्री के ऐलान के बाद समूचे देश में हाहाकार मच गया.
 
आज के अर्धसत्य में आपके सामने नोट के इस पूरे खेल का वो सच सामने रखा जाएगा जिसके बारे में आपने शायद अभी तक देखा-सुना नहीं है. वो कौन है जो बैंक जाने से डर रहा और नोट को गंगा में फेंक रहा है ? वो कौन है जिसने करोड़ों की रकम में आग लगा दी. क्या ये बात सच है कि मुकेश अंबानी को पहले से पता था कि 500-1000 के पुराने नोट बंद होने वाले हैं. क्या मायावती-मुलायम का गुस्सा उनके अपने नोट के लिए है. क्या बीजेपी नेताओं को पहले से सचमुच में पता था कि इतना बड़ा फैसला होने वाला है. जैसा केजरीवाल ने आरोप लगाया है. क्या सचमुच 500-1000 के नोट बदल जाने से काला धन खत्म हो जाएगा.
 
जलाए गए नोट
तीरथराजी उत्तर प्रदेश के कुशीनगर की रहने वाली थी. उनकी मौत उस तबके के सदमे की गवाही है जिसने बड़ी तकलीफ सहकर पैसे जमा किए लेकिन उसको ये समझ नहीं आया कि उसी का पैसा बचाने के लिये पैसा बदलने का हुक्म सरकार ने सुना रखा है. इधर ख़बर आई कि हजार के नोट बंद, उधर नोटों के बंडल में आग लगाई जाने लगी. बंडल के बंडल नोट फूंक डाले गए. कितने नोट होंगे उसका अंदाजा राख के इस ढेर से लगाइए.
 
गंगा नदी में अठ्टनी-चवन्नी, सिक्के तो हम सालों से इसमें श्रद्धा से डालते आए हैं. लेकिन कभी सोचा था कि गंगा में हजार-हजार के नोट ऐसे उतराएंगे. लोगों को जैसे ही ये खबर मिली नोट तैर रहे हैं. वो छानने के लिए पहुंच गए. लेकिन सवाल फिर से है कि ये नोट किसके हैं, किसने बैंक जाने के बदले नदी में एक साथ इतने हजार के नोट फेंक दिए.
 
इंडिया न्यूज के मैनेजिंग डायरेक्टर राणा यशवंत के साथ देखिए अर्धसत्य

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