नई दिल्ली. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के आसमान में F-16 विमानों ने रात में उड़ान भरी, इस्लामाबाद से लाहौर और पेशावर जानेवाली सड़कों को बंद कर दिया गया है और वहां विमानों को उतारने-उड़ाने का अभ्यास किया गया. पाकिस्तान की तरफ से ये बताने की कोशिश की जा रही है कि अगर भारत ने उरी में हुए आतंकी हमले के चलते पाकिस्तान के खिलाफ कोई कार्रवाई की तो फिर युद्द होगा. 
 
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भारत में मीडिया के तेवर ऐसा है जैसे उसकी चले तो हिंदुस्तान से सारे बम-बारुद, तोप-टैंक लेकर पाकिस्तान में घुस जाए. देश के लोगों में भी उबाल दिख रहा है. लेकिन सरकार खासकर प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी चुप हैं और उनकी चुप्पी ही पाकिस्तान को परेशान किए हुए हैं. देश में भी यह एक पहेली बन गई है. आखिर मोदी क्या करेंगे. 
 
भारत के पास युद्द के अलावा भी पाकिस्तान को सबक सिखाने के विकल्प हैं? भारत के मुकाबले पाकिस्तान ताकत और हैसियत में कहां खड़ा है और जंग हुई तो वो कहां जाकर खड़ा होगा. पाकिस्तान में इन विमानों का अभ्यास और इसके बाद वहां के रक्षा मंत्री का ट्वीट कि – हमारे आसमान के रखवाले लगातार तैयारी में हैं. हमारे मोटरवे ही हमारे रनवे हैं- यह बताता है कि पाकिस्तान बेचैन है. भारत से लगनेवाली सीमा और एलओसी की तरफ उसकी फौजों की हलचल दिख रही है. 
 
भारत ने एलओसी के आसपास अपनी सेना की तैनाती बढाई तो पाकिस्तान को ये लगा कि मोदी कुछ करने की तैयारी में हैं. गुरुवार को पीएम ने मिलिटरी आपरेशन रुम में घंटों बिताए और एलओसी की तरफ सेना की मूवमेंट का जायजा लिया. ऊपर से रक्षा मंत्री का बयान की पीएम ने कहा है कि पाकिस्ता को सबक सिखाएंगे तो कुछ करेंगे ही- यह पाकिस्तान को अंदर तक हिला देता है. लेकिन सवाल ये है कि पीएम कैसे सबक सिखाएंगे. मतलब ये कि भारत के पास क्या क्या विकल्प है.
 
इस देश के जितने भी समझदार नागरिक हैं उनको लगता है कि एक जाहिल और खुद ही तबाह हो रहे पड़ोसी को युद्द किए बिना अगर घुटनों के बल चला दिया जाए तो अच्छा. इस लिहाज से तीन चार रास्ते सुझाए जा रहे हैं. 
 
पहला – पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक, दूसरा सिंधु नदी समझौता रद्द करना, तीसरा पाकिस्तान को जो हमने मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दे रखा है उसको खत्म करना, चौथा पाकिस्तान के अंदर के अलगाववादी आंदोलनों को समर्थन देकर उसके टुकड़े करवा देना और पांचवा पाकिस्तान को आतंवादी देश घोषित करवाकर उसको अलग थलग कर देना.
 
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