नई दिल्ली. पिछले दो दशक से देश की राजनीति अयोध्या मंदिर निर्माण और बाबरी मस्जिद कांड के इर्द-गिर्द घूम रही है. धर्म के नाम पर कई राजनीतिक दलों ने खुद को मुसलमानों का सबसे बड़ा हितैषी साबित किया तो कई ने बीजेपी को मुसलमानों के लिए गुनाहगार साबित किया. एक किताब में दावा किया गया है कि राम मंदिर बाबर ने नहीं बल्कि औरंगजेब ने तोड़ा था. 
 
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इस किताब को गुजरात के पूर्व आईपीएस किशोर कुणाल ने लिखा है. इसमें यह साबित करने की कोशिश की गई है कि अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर मौजूद था, जिसे गिराकर उस जगह पर बाबरी मस्जिद बनाई गई थी. किताब का नाम ‘अयोध्या रीविजिटेड’ है.
 
किताब में दावा किया गया है कि बाबर कभी अयोध्या गया ही नहीं था. जबकि इतिहासकारों का कहना है कि बाबर ने अपने अवध के गवर्नर मीर बाकी को राममंदिर तोड़ने का आदेश दिया था. इतिहास में यह भी बताया गया है कि बाबरी मस्जिद को 1528 AD में बनाया गया था. 
 
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कुणाल ने कहा कि इसमें शोध की जरूरत है. औरंगजेब ने अयोध्या में राम मंदिर को तोड़ा इस बात का कोई तथ्य नहीं मिला है. किशोर कुणाल जी का कहना है कि बाबर से लेकर शाहजहां तक सभी मुगल शासक काफी उदार थे और सभी धर्मो को संरक्षण प्रदान करते थे. लेकिन औरंगजेब के शासन काल में देश में कट्टरता बढ़ी. 
 
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