नई दिल्ली. देश के प्रसिद्द उद्योगपति विजय माल्या 17 बैंकों के 9 हजार करोड़ बिना चुकाए देश छोड़कर चले गए हैं. अब इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं.
 
एक तरफ केंद्र सरकार पर सवाल यह उठ रहा है कि माल्या देश छोड़ कर कैसे चले गए वहीं विपक्ष पर सवाल है कि उनके समय में माल्या को इतना पैसा उधार क्यों दिया गया?
 
केंद्र सरकार पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि एक मार्च को संसद में बोला जाता है कि माल्या देश में ही हैं वहीं अगले दिन 2 मार्च को अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी सुप्रीम कोर्ट में कहते हैं कि माल्या देश छोड़ कर लंदन चले गए हैं. यह भी कहा जाता है कि माल्या डिप्लोमेटिक पासपोर्ट की मदद से विदेश गए हैं जिसकी हैसियत एक सांसद के इस्तेमाल की मानी जाती है.
 
वित्त मंत्री का बयान
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस मामले पर कहा कि उनकी जो भी संपत्ति भारत में है, उसे जब्त करने की तैयारी चल रही है. उनसे बैंक एक-एक पैसा वसूल करेंगे. जब वह भारत छोड़कर गए तब तक उन्हें रोकने का कोई आदेश नहीं था.
 
क्या है मामला?
दरअसल माल्या की कंपनी कर्ज में डूबी हुई है जिसने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया समेत 17 बैंकों के 9 हजार करोड़ रुपये का ऋण लिया हुआ है. पैसा डूब जाने के डर से बैंकों ने माल्या के देश से बाहर न जाने के चलते सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिका में कहा गया है कि माल्या डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल यानी DRT में पेश होने के लिए जमानत राशि जमा कराएं और DRT जल्द इस मामले की सुनवाई पूरी करे.
 
विजय माल्या के देश छोड़ कर भाग जाने और बैंकों का पैसा न लौटाने के पीछे बहस के बिंदु कई हैं लेकिन मामले से जुड़ी कई अहम बातें अब भी सामने नहीं आई हैं.
 
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