नई दिल्ली. क्या साल 2014 में केंद्रीय सत्ता में परिवर्तन आने के बाद देश भ्रष्टाचार मुक्त हुआ है? क्या हम और आप आज यह कह सकते हैं कि हमारा कोई भी सरकारी काम बिना घूस के पूरा होता है? अगर मोदी सरकार के एक साल बाद आप आंकलन करें कि देश में भ्रष्टाचार कितना कम हुआ है, तो स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं आया है.

एक घटना कानपुर की लीजिए जहां 37 हजार लोगों की जिंदगी भर की कमाई भ्रष्टाचारियों के चक्कर में ऐसी उलझी की कि अब वह कभी वापस आएगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है. यहां ब्रम्हावर्त कानपुर का बहुत पुराना बैंक है. 1983 से अब तक इस बैंक के पास छोटे बड़े 37 हजार खाता धारक है. पूरे कानपुर में इसकी 9 शाखाएं है. यह 900 रुपए से शुरु हुआ बैंक अब 100 करोड़ की पूंजी का है. लेकिन फिलहाल इस बैंक के सारे वित्तीय अधिकार आरबीआई ने छीन लिए है, क्योंकि यहां बैंक के कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी तरह से लोन ले लिया गया और लोन लेने वाले अब गायब हो गए हैं.

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