Mumbai Road Accident: मुंबई के मालाड पश्चिम में रविवार रात एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया. 30 अगस्त की रात करीब 8 बजे एसवी रोड स्थित मामलतदार वाड़ी सिग्नल के पास तेज रफ्तार कार ने सड़क पर मौजूद करीब 20 लोगों को जोरदार टक्कर मार दी. हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई.
इस दर्दनाक हादसे में मलाड पश्चिम निवासी एडवोकेट प्रियांका मयंक सत्रा की मौके पर ही मौत हो गई. बताया जा रहा है कि कार का पहिया उनके शरीर के ऊपर से गुजर गया. हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि एक घायल व्यक्ति के सिर में करीब 20 टांके लगाए जाने की जानकारी सामने आई है.
एक पल में उजड़ गया परिवार
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार मलाड सबवे की ओर से तेज रफ्तार में आ रही थी. देखते ही देखते कार ने सड़क पर मौजूद लोगों को अपनी चपेट में ले लिया. किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला.
एडवोकेट प्रियांका सत्रा भी इस हादसे की चपेट में आ गईं और उनकी जिंदगी हमेशा के लिए खत्म हो गई. एक सड़क हादसे ने परिवार, दोस्तों और परिचितों को गहरे सदमे में डाल दिया.
हादसे के बाद पुलिस कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
हादसे के बाद कार चालक को मलाड पुलिस ने हिरासत में लिया. लेकिन, इसके बाद मृतका के परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. परिजनों का आरोप है कि पुलिस स्टेशन में आरोपी को मोबाइल फोन इस्तेमाल करने और कुर्सी पर बैठने की सुविधा दी गई.
उनका यह भी दावा है कि रात करीब 1:20 बजे एक महिला पुलिस अधिकारी के आने के बाद आरोपी को मेडिकल जांच के नाम पर लॉकअप से बाहर ले जाया गया और पुलिस स्टेशन के पीछे स्थित AC कमरे में बैठाया गया. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है. पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है.
परिजनों का सवाल- आरोपी को आखिर कैसी सुविधा दी गई?
मृतका के परिवार और उनके साथ पहुंचे लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि आरोपी पुलिस हिरासत में था, तो उसे लॉकअप से बाहर क्यों ले जाया गया? क्या उसे किसी तरह की विशेष सुविधा दी गई? क्या मामले में किसी प्रकार का दबाव या नरमी बरती गई? इन आरोपों के चलते अब पुलिस की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है.
पीड़ित परिवार की 4 मांगें
- आरोपी के खिलाफ कड़ी और उचित कानूनी धाराओं में मामला दर्ज हो.
- कथित VIP ट्रीटमेंट की स्वतंत्र जांच कराई जाए.
- यदि पुलिसकर्मियों की प्रथमदृष्टया लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो.
- हादसे से लेकर पुलिस स्टेशन तक के सभी CCTV फुटेज सुरक्षित रखकर निष्पक्ष जांच की जाए.
अब सबसे बड़ा सवाल
- करीब 20 लोगों को अपनी चपेट में लेने वाली कार की रफ्तार कितनी थी?
- हादसे में एक महिला वकील की जान चली गई- क्या इस मौत का जिम्मेदार सिर्फ चालक है?
- आरोपी को कथित तौर पर VIP सुविधा देने के आरोपों की सच्चाई क्या है?
इन सवालों के जवाब अब पुलिस जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण से सामने आने हैं. मृतका एडवोकेट प्रियांका सत्रा के परिवार और हादसे में घायल हुए लोगों के परिजन न्याय और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
(मुंबई से शाहिद अंसारी की रिपोर्ट)