वॉशिंगटनः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने येरूशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देने की घोषणा की है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इससे मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया तेज होगी और टिकाऊ समझौते का मार्ग प्रशस्त होगा. उन्होंने कहा कि वे अमरिकी दूतावास को आदेश देंगे कि अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से यरुशलम स्थानांनतरित करने की प्रक्रिया शुरू की जाए. ट्रंप के इस फैसले पर कई अरब देशों के नेताओं पहले से ही संवेदनशील पश्चिम एशिया में और तनाव बढ़ने की चेतावनी दी है.

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि अतीत में असफल नीतियों को दोहराने से हम अपनी समस्या का हल नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि आज घोषणा इजरायल और फलीस्तीनी एरिया के बीच विवाद के प्रति एक नए नजरिए की शुरुआत है. बता दें कि ट्रंप ने 2016 में अपने चुनाव अभियान के दौरान इसका वादा किया था. ट्रंप के इस फैसले पर अरब नेताओं ने चेताया कि पश्चिम एशिया और दूसरी जगहों पर व्यापक विरोध विरोध प्रदर्शन शुरू हो सकते हैं.

सऊदी अरब के शाह सलमान और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल-सिसी ने ट्रम्प प्रशासन के इस फैसले को लेकर चेतावनी दी है. सलमान ने इसे एक ‘खतरनाक कदम’ बताते हुए आगाह किया कि इससे ‘दुनिया भर में मुस्लिमों की भावनाएं भड़केंगी’. हालांकि येरूशलम में एक कार्यक्रम में शामिल हुए इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप की इस घोषणा पर कोई टिप्पणी नहीं की. इसी बीच फलस्तीनियों ने कहा कि ऐसा करना मौत को गले लगाने जैसा है. जबकि इसरायल ने अन्य देशों से भी अमेरीका का अनुसरण करने की अपील की है. गाजा पट्टी के दक्षिणी हिस्से में फलस्तीनियों ने ट्रंप, इसराइली प्रधानमंत्री की तस्वीरें जला कर विरोध प्रदर्शन किया है.

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