वाशिंगटन. संयुक्त राष्ट्र महासभा की सुरक्षा परिषद में भारत का प्रवेश रोकने के लिए चीन ने रिश्वत दी थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, संयुक्त राष्ट्र महासभा के पूर्व प्रेसिडेंट जॉन एशे को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि एशे की गिरफ्तारी के बाद कुछ महत्त्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं. भारत इससे पहले भी आरोप लगा चुका है कि सुरक्षा परिषद की सुधार प्रक्रिया को बाधित करने के लिए यूएन अधिकारियों को बतौर रिश्वत पैसे दिए जा रहे हैं. जॉन एशे पर चीन से रिश्वत लेने का आरोप लगा है. 
 
क्या है मामला? 
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अटॉर्नी अधिकारी प्रीत भरारा ने जॉन एशे पर चीन से रिश्वत लेने का आरोप लगाया था. उनका आरोप है कि जॉन एशे ने मकाउ में संयुक्त राष्ट्र प्रायोजित कॉन्फ्रेंस सेंटर के समर्थन के लिए चीनी कारोबारियों और अधिकारियों से 13 लाख डॉलर रिश्वत ली थी. 
 
प्रीत भरारा ने यह आरोप भी लगाया है कि चीन के नागरिकों ने जॉन एशे को ऐंटिगुआ में उनके कारोबार समर्थन के लिए लाखों डॉलर दिए. हालंकि इस रिश्वत कांड से जुड़ी बहुत कम बातें अभी सार्वजनिक हुई हैं.  
 
इन आरोपों से भारत के इन दावों को बल मिल रहा है कि चीन भारत को सुरक्षा परिषद में नहीं आने देना चाहता है.