काठमांडू. नेपाल के संविधान बनने के बाद पिछले कई दिनों से मधेशी समुदाय और तराई क्षेत्र के लोग संविधान में उचित अधिकार न मिल पाने के कारण आन्दोलन कर रहे थे. सूत्रों के मुताबिक़, नेपाल की नवनिर्वाचित सरकार मधेशी नेताओं से बातचीत के लिए राजी हो गया है. नेपाल ने मधेशी समुदाय के नेताओं को आमंत्रित किया है.    
 
आपको बता दें कि भारत के साथ रिश्ते सामान्य बनाने के लिए नेपाल के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री कमल थापा रविवार के दिन तीन दिवसीय यात्रा के लिए भारत पहुंचे हैं. पाल में पद संभालने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा पर भारत आए थापा ने काठमांडू में कहा कि वह इस यात्रा के परिणाम को लेकर आशावादी हैं और इससे दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत होंगे.
 
थापा उस तीन सदस्यीय टीम के समन्वयक भी हैं जो नेपाल के व्यापार बिन्दुओं पर मधेशी लोगों द्वारा की गई नाकेबंदी को खत्म कराने के लिए भारतीय अधिकारियों से बातचीत के लिए गठित की गई है. सूत्रों के अनुसार, नेपाल ने जरूरी सामानों की सप्लाई जारी रखने को कहा है. 
 
आपको बता दें कि भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में तराई थारुहट संघर्ष समिति और मधेशी समुदाय द्वारा की गई नाकाबंदी के लिए नेपाल सरकार ने भारत को जिम्मेदार ठहराते हुए यूएन में आवाज उठाई है. नेपाल सरकार के इस कदम से समिति के आंदोलनकारी दु:खी हैं.  
 
हालांकि भारत ने नेपाल के आर्थिक नाकेबंदी के आरोपों को निराधार बताया है. विदेश मंत्रालय का कहना है कि नेपाल में वर्तमान स्थिति के लिए भारत जिम्मेदार नहीं है. पहले नेपाल अपने यहां के हालात सुधारे. 
 
इसके अलावा विदेश मंत्रालय  प्रवक्ता विकास स्वरुप ने कहा था कि नेपाल में जारी समस्या के लिए नेपाल ही जिम्मेदार है. मधेशी समुदाय संविधान में संशोधन को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहा है जिसके चलते भारत-नेपाल सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुई है.  नेपाल में अशांति के चलते भारतीय सामान वहां नहीं पहुंच पा रहा है.