मेलबर्न. आस्‍ट्रेलियाई सरकार ने भारतीय माइनिंग कंपनी अडानी के कारमाईकल कोल माइन और रेल प्रोजेक्‍ट को दोबारा मंजूरी दे दी है. आस्ट्रेलिया के पर्यावरण मंत्री ग्रेग हंट ने 36 सख्‍त शर्तों के साथ इस प्रोजेक्‍ट को अनुमति दी है.
 
इसमें 31 हजार हेक्‍टेयर में संरक्षण व सुधार, कम्‍युनिटी के जुड़े मसले और कंपनी द्वारा उच्‍चतम एन्‍वायरमेंटल स्‍टैंडर्ड मानकों को पूरा करने जैसी शर्तें शामिल हैं.
 
क्या थी आपत्ति?
दरअसल, ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने अडानी की कंपनी को क्वींसलैंड में कारमाइकल खदान के खनन की स्वीकृति पिछले साल दी थी. लेकिन पर्यावरणविदों के विरोध के बाद इस पर बड़ी बहस हुई. इसके बाद अदालत ने तर्क दिया कि लाइसेंस देते वक्त पर्यावरण मंत्री ने विलुप्त हो रहे जानवरों के मामले को ध्यान में नहीं रखा. आपत्ति यह भी थी कि खदान में 12 अरब लीटर पानी की सालाना जरुरत थी.
 
‘ग्रेट बैरियर रीफ’ का भी जिक्र
इस प्रोजेक्ट को पर्यावरणविदों ने ‘ग्रेट बैरियर रीफ’ के लिए भी बड़ा खतरा बताया है. उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में स्थित ग्रेट बैरियर रीफ को 1981 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा दिया. यहां 625 प्रकार की मछलियां, 133 किस्मों की शार्क, नीले पानी में जेली फिश की कई प्रजातियां, घोंगा और कृमि मौजूद हैं. 30 से ज्यादा किस्मों की व्हेल और डॉल्फिन भी यहां रहती हैं. लेकिन पिछले कुछ दशकों से यहां की मूंगा चट्टानें और इसकी समृद्ध जैव विविधता प्रदूषण और इंसानी दखल से जूझ रहे हैं.