काठमांडू. सरकार संविधान में संशोधन के लिए संसद में प्रस्ताव रखने जा रही है. कैबिनेट मीटिंग में यह निर्णय लिया गया है. आपको बता दें कि पिछले कई दिनों से मधेशी समुदाय, सीपीएन-यूएमएल, यूसीपीएन(माओइस्ट) और कई पार्टियां ये आरोप लगा रहीं थीं कि उन्हें नेपाल के नवनिर्मित संविधान में उनको अधिकार नहीं दिए गए हैं. उनके अधिकारों की अनदेखी की गई है. 
 
काठमांडू पोस्ट में छपी ख़बर के मुताबिक़, एक मंत्री नारायण प्रकाश सौद ने कहा है कि सरकार सभी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए संविधान में संशोधन का प्रस्ताव रखेगी. इससे सभी समुदायों का संविधान में उचित प्रतिनिधित्व होगा.
 
 
 
क्या है मामला?
नेपाल का संविधान लागू होने के बाद भारत के सीमा से सटे तराई इलाके के लोगों का आरोप है कि नये संविधान में उनके अधिकारों की अनदेखी की गई है. मधेशी और थारू जनजाति के लोग नये संविधान को लेकर नाराज हैं. उनका आरोप है कि नये संविधान के अनुसार उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक समझा जाएगा. अपनी मांगों के लिए ये समुदाय पिछले कई दिनों से प्रदर्शन कर रहा है और कई जगह ये प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुका है. इन प्रदर्शनों में कई लोगों की जान भी जा चुकी है.