अबु धाबी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो दिवसीय दौरे के बीच रविवार को इस देश की सरकार ने अबु धाबी में एक मंदिर के निर्माण के लिए जमीन आवंटित करने का फैसला किया. यूएई की राजधानी में निर्मित होने वाला यह पहला मंदिर होगा. इस ‘ऐतिहासिक’ निर्णय के लिए मोदी ने यूएई नेतृत्व का शुक्रिया अदा किया. दुबई में जहां दो मंदिर हैं, वहीं अबु धाबी में एक भी मंदिर नहीं है. दुबई में एक मंदिर भगवान शिव का है जबकि दूसरा भगवान कृष्ण का है.
 
 
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने यह जानकारी देते हुए ट्वीट किया, ‘भारतीय समुदाय की लंबी प्रतीक्षा खत्म हुई. प्रधानमंत्री की यात्रा पर यूएई सरकार ने अबु धाबी में एक मंदिर बनाने के लिए जमीन आवंटित करने का फैसला किया.’ उन्होंने लिखा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक फैसले के लिए यूएई नेतृत्व का शुक्रिया अदा किया.’ यूएई में करीब 26 लाख भारतीय रहते हैं.
 
‘शांति का संदेश सुनाता है इस्लाम’
मोदी ने मस्जिद की विजिटर्स बुक में इस्लाम को शांति और सद्भावना का प्रतीक बताया. शेख जायेद मस्जिद इस्लामिक स्थापत्य कला की श्रेष्ठतम कृति है. यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी मस्जिद है. सऊदी अबर में मक्का मदीना दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिद है. इस मस्जिद का नाम संस्थापक और यूएई के पहले राष्ट्रपति दिवंगत जायेद बिन सुल्तान अल नाह्यान के नाम पर है. इस मस्जिद में 40 हजार लोग आसानी से समा सकते हैं। इसका निर्माण 1996 से 2007 के बीच कराया गया था.
 
34 सालों के बाद मोदी यूएई जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं. मोदी को एयरपोर्ट पर रिसीव करने राजकुमार शेख सुल्तान बिन जायेद अल नाह्यान अपने पांच भाइयों के साथ पहुंचे थे. राजकुमार शेख ने मोदी का स्वागत प्रोटोकॉल तोड़कर किया. यूएई ने इसी साल मई में ऐसा स्वागत मोरक्को के किंग का किया था. संयुक्त अरब अमीरात के लिए भी मोदी का यह दौरा काफी महत्वपूर्ण है. इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अबू धाबी के राजकुमार और यूएई आर्म्ड फोर्सेज के डेप्युटी कमांडर शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाह्यान भारतीय पीएम को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे. मोदी यूएई पहुंचने के बाद सबसे पहले शेख जायेद मस्जिद पहुंचे. इसके बाद वह एक मजदूर कैंप में गए.
एजेंसी इनपुट भी