वॉशिंगटन:  विदेश मंत्री सुषमा स्वाराज ने यूएन की महासभा में पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है. सुषमा स्वराज ने कहा है भारत की पहचान आईटी सुपर पॉवर के तौर पर हुई जबकि पाकिस्तान की दहशतगर्दी के रूप में हुई है. उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद का सबसे पुराना शिकार है.
 
उन्होंने कहा कि सभी देशों को आतंकवाद पर एक राय बनाने की जरूरत है. दुनिया भर में पाकिस्तान की पहचना आतंकी देश के रूप में हुई है. पाकिस्तान ने लश्कर और जैश बनाया. भारत ने वैज्ञानिक, आईटीयंस बनाए.  हम प्रकृति की शांति की कामना कहते हैं.  
 
 
महासभा में सुषमा स्वराज ने कहा कि पिछले एक साल में भारत में कई बदलाव हुए. बहुत से संकटों में समाधान के लिए हमने 2015 में 2030 तक का एजेंडा तैयार किया था. गरीबी को दूर करना टिकाऊ विकास का पहला लक्ष्य है. भारत ने पीएम मोदी ने गरीबी निवारण के लिए दूसरा रास्ता चुना है.
 
विदेश मंत्री ने कहा कि हमारी सारी योजना गरीबी को दूर करने के लिए चलाई जा रही हैं. सरकार ने 30 करोड़ गरीब लोगों को बैंक के अंदर पहुंचाया. जिनके पास पैसा नहीं था उनका जीरो बैलेंस के साथ एकाउंट खुला. 30 करोड़ लोगों को हमने बैंक से जोड़ने का काम किया. जबकि मुद्रा योजना के तहत हमने उस व्यक्ति को कर्ज दिलाया जिसे बैंक से कभी कर्ज नहीं मिला. इसके अंतर्गत 70 प्रतिशत महिलाओं को लोन दिया गया है.
 
 
सुषमा स्वराज ने कहा कि पीएम मोदी ने शांति की नियत दिखाई. पाकिस्तान से सवाल है कि क्या वहां सरकार में बैठे लोग कभी इकट्ठे बैठकर सोचे कि है भारत और पाकिस्तान साथ-साथ आजाद हुए. लेकिन भारत की पहचान आईआईटी, आईआईएम, वैज्ञानिक इत्यादि को लेकर बनी है जबकि पाकिस्तान दहशतगर्दी के लिए जाना जाता है. 
 
सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान पर करारा हमला करते हुए कहा कि जो मुल्क हैवानियत की हदें पार करके, सैकड़ों बेगुनाहों को मौत के घाट उतरवाता है वह यहां खड़ा होकर हमें इंसानियत का सबक सिखा रहा था, मानवाधिकार का पाठ पढ़ा रहा था. उन्होंने कहा कि पाक के वजीर-ए-आजम ने हमें स्टेट स्पॉन्शर्ड टेररिज्म फैलाने का गुनाहगार बताया और हम पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया.
 
लेकिन जिस वक्त वो वोल रहे थे तो सुनने वाले लोग कह रहे थे, ‘लुक हू इज टॉकिंग. देखो तो बोल कौन रहा है? अपने संबोधन में सुषमा ने आतंकवाद के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन और साइबर सिक्योरिटी जैसे वैश्विक मुद्दे उठाए. इसके अलावा उन्होंने वैश्विक विकास में भारत के योगदान का जिक्र किया.