नई दिल्ली: भारत समेत 113 देशों ने हिंसा के खात्मे के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा में चर्चा कराने का समर्थन किया है. जबकि पाकिस्तान समेत 21 देशों ने परिचर्चा का विरोध किया है. मतदान के दौरान 17 देश अनुपस्थित रहे. यूएन में भारत के स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि इस विषय पर चर्चा खुली, विस्तृत और पारदर्शी होनी चाहिए. अकबरुद्दीन ने कहा कि किसी भी देश के लिए रक्षा करने की जिम्मेदारी हरेक देश के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है. इसलिए इसे यूएन जनरल असेंबली के 72वें सत्र के एजेंडे में शामिल का भारत समर्थन करता है. उन्होंने कहा भारत जैसे कई अन्य देशों ने कानूनी रूप से जटिल और राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण मुद्दों के समाधान के लिए उचित रास्ता निकाले जाने की जरूरत का समर्थन किया है.
 
इस चर्चा के दौरान दुनिया भर के दोशों के प्रतिनिधि युद्ध, नरसंहार, जातिगत हिंसा और मानवता के खिलाफ अपराधों की रोकथाम को लेकर विस्तृत से बहस करेंगे. बता दें कि 12 साल में पहली बार यूएन की जनरल असेंबली में परिचर्चा के लिए किसी भी विषय का चुनाव करने को मतदान कराया गया है.
 
अकबरुद्दीन ने यूएन में  पाक के सहयोगी आतंकी संगठन श्कर-ऐ-तैयबा और जैश-ऐ-मोहम्मद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने कहा कि इन दोनों संगठनों को तुरंत बैन कर देना चाहिए. उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कहा है कि वह जैसा बोएगा, वैसा ही काटेगा. अगर पाकिस्तान शांति स्थापना के लिए इतना ही संजिदा है तो उसे इसके लिए आगे आकर काम करना होगा. 
 

 
चीन को भी खूब सुनाया
सैय्यद अकबरुद्दीन ने चीन को भी इसके लिए जमकर खरीखोटी सुनाई. चीन पर आरोप लगाते हुए कहा कि चीन ने कई बार इन आतंकी संगठनों को बचाए रखा है. चीन अलकायदा और उसके सहयोगी संगठन के खिलाफ कार्रवाई से और पाक के जैश प्रमुख मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के भारत के प्रयासों पर भी रोक लगा चुका है.