वाशिंगटन. ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तेहरान और दुनिया की छह महाशक्तियां मंगलवार को एक व्यापक समझौते पर पहुंच गईं. आर्थिक प्रतिबंध हटाने के बदले ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने को तैयार हो गया है. तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में दो हफ्ते तक चली कठिन वार्ता के बाद ईरान तथा ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जर्मनी, रूस व अमेरिका एक व्यापक समझौते पर पहुंच गए.
 
रूस को देगा अपने परमाणु भंडार
समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने एक स्रोत के हवाले से कहा कि समझौते के तहत ईरान अपने अधिकांश परमाणु भंडार को रूस पहुंचाएगा, जिसके बाद उसकी क्षमता परमाणु बम बनाने लायक नहीं रह जाएगी. ईरानी मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, समझौते के तहत संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के आधार पर ईरान पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाए गए सभी आर्थिक व वित्तीय प्रतिबंध पूरी तरह खत्म हो जाएंगे.
 
लगभग 100 पन्नों में समाहित इस समझौते में ईरान के परमाणु मुद्दे के कई महत्तवपूर्ण हिस्से दर्ज हैं, जिसमें प्रतिबंधों से राहत व कार्य योजना, परमाणु प्रौद्योगिकी सहयोग, परमाणु संयंत्रों की निगरानी समिति का गठन, परमाणु क्षमता को सीमित करना व संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का मसौदा शामिल है. 

नेतन्याहू ने बताया ऐतिहासिक भूल 
इस समझौते पर इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, ‘यह समझौता एक ऐतिहासिक भूल है.’ नेतन्याहू ने कहा, ‘जब आप किसी भी कीमत पर कोई समझौता करने को इच्छुक होते हैं, तो यही परिणाम होता है.’ यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की विदेश नीति का एक उच्च बिंदु है.
 
ओबामा ने बताया उपलब्धि
ओबामा ने व्हाइट हाउस में कहा, ‘दो साल तक चली वार्ता के बाद आज अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ एक उपलब्धि हासिल की है, जो पूरे एक दशक में नहीं हो पाया. ईरान के साथ एक व्यापक परमाणु समझौता हुआ है, जो उसे परमाणु हथियार बनाने से रोकेगा.’ सीएनएन ने ओबामा के हवाले से कहा, ‘परमाणु हथियार पाने के सभी रास्ते बंद हो गए हैं. इस समझौते में व्यापक निरीक्षण की गुंजाइश है। यह समझौता भरोसे पर नहीं, बल्कि पुष्टि के आधार पर हुआ है.’
 
ईरान ने ऐतिहासिक पल करार दिया
ईरान के विदेश मंत्री जावेद जारिफ ने इस समझौते को ऐतिहासिक पल करार दिया, लेकिन इसे परिपूर्ण नहीं कहा. ईरान तथा विश्व की छह महाशक्तियों के बीच मंत्री स्तरीय बैठक में जारिफ ने कहा, ‘मेरा मानना है कि यह एक ऐतिहासिक पल है. हम एक ऐसे समझौते पर पहुंच गए हैं, जो हर किसी के लिए तो उपयुक्त नहीं है, लेकिन इसमें हम कुछ हासिल कर सकते हैं और यह हम सब के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.’
 
ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने समझौते की ट्विटर पर पुष्टि की और कहा, ‘यह रचनात्मक कार्य को दर्शाता है.’ साल 2013 में रूहानी के सत्ता में आने के बाद तेहरान तथा छह देशों ने परमाणु वार्ता तेज कर दिया था और नवंबर 2013 में जेनेवा में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत ईरान को प्रतिबंधों में सीमित राहत के बदले अपने कुछ विवादित परमाणु गतिविधियों को बंद करना पड़ा था.
 
क्या थीं दिक्कतें
बीते 18 महीने में ईरान और पी-5 प्लस1 समूह के बीच कई बार वार्ता हुई, जिसमें उन कठिन मुद्दों को सुलझाया गया, जो एक समय में असंभव लगता था. ईरान लंबे समय से कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है. पश्चिमी देशों को डर है कि वह इसका इस्तेमाल परमाणु बम बनाने के लिए कर सकता है.
 
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक यूकिया अमानो ने कहा कि हमने अतीत तथा वर्तमान के शेष मुद्दों के स्पष्टीकरण के लिए ईरान के साथ एक कार्ययोजना पर हस्ताक्षर किए हैं. उन्होंने कहा, ‘ईरान के परमाणु कार्यक्रम के संबंध में मैंने अतीत तथा वर्तमान के शेष मुद्दों के स्पष्टीकरण के लिए ईरान तथा आईएईए के बीच एक कार्ययोजना पर हस्ताक्षर किया है.’ अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए सालों तक कठिन वार्ता चली. यह समझौता परमाणु कार्यक्रमों को सीमित करने के लिए है, ताकि तेहरान परमाणु हथियारों का निर्माण न कर सके. इसके बदले ईरान को प्रतिबंधों से राहत के रूप में अरबों डॉलर की मदद मिलेगी.

एजेंसी इनपुट भी