वाशिंगटन. सबसे पहले, सबसे तेज़, सबसे सटीक- ब्रेकिंग न्यूज़. हम ये मानते होंगे कि सिर्फ भारतीय टीवी मीडिया में ही सेकेंड-सेकेंड की लड़ाई चल रही है लेकिन इस तस्वीर को देखने के बाद आपकी राय एकदम से बदल जाएगी.

ये भागते-दौड़ते युवक-युवतियां अमेरिका के इंटर्न पत्रकार हैं जो अमेरिका में अपने-अपने समाचार चैनल के पत्रकार तक खबर पहुंचाने के लिए दौड़ रहे हैं. जाहिर है कि जो सबसे तेज भागेगा, वो सबसे पहले पहुंचेगा और उस चैनल पर वो ख़बर सबसे पहले दिखेगी. ये कुछ सेकेंड पहले पहुंचने की होड़ दिल्ली से वाशिंगटन तक है. 

ये तस्वीर उस दिन की है जब अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक वैवाहिक रिश्तों पर ऐतिहासिक फैसला देते हुए उसे कानूनी करार दिया था और पूरे देश में लागू कर दिया था. इस फैसले से अमेरिका ऐसा करने वाला दुनिया का 21वां देश बना था. 

सुप्रीम कोर्ट के कैंपस में फोन और कैमरा ले जाने की इजाजत नहीं थी तो सारे चैनलों के पत्रकार कोर्ट के बाहर ही कैमरा ऑन करके लाइव हो गए. कोर्ट से बाहर गेट तक की दूरी करीब 100 मीटर है.

इंटर्न पर ही टिका था पहले ख़बर देने का दारोमदार

कोर्ट के अंदर इंटर्न पत्रकार भेज दिए गए जिन्हें ऑर्डर सुनकर बाहर आकर अपने चैनल को यह खबर देनी थी. बस फिर क्या था. जैसे ही फैसला आया, सब दौड़े-भागे अपने-अपने चैनल के पत्रकार के पास ये बताने की कोर्ट ने क्या फैसला दिया है. कहने की जरूरत नहीं है कि कोर्ट का फैसला उसी चैनल पर बाकी चैनलों से कुछ सेकेंड पहले पहले चला होगा जिसका इंटर्न शानदार धावक रहा हो.

इंटर्न मतलब जो कॉलेज से पत्रकारिता की पढ़ाई करके समाचार चैनलों के कामकाज को नजदीक से समझने के लिए मीडिया संस्थानों में पहुंचते हैं. इन्हें मीडिया संस्थान अपने यहां होने वाले हर तरह के काम को समझाते हैं और उसे करने का मौका देते हैं.