ओस्लो.  कोलंबिया के राष्ट्रपति ख्वान मानवेल सांतोस को शांति के लिए 2016 का नोबेल पुरस्कार दिया गया है.
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सांतोस को यह पुरस्कार कोलंबिया के सबसे बड़े विद्रोही संगठन फार्क (द रिवोल्यूशनरी आर्म ऑफ कोलंबिया) के साथ शांति स्थापित करने की कोशिशों की वजह से दिया गया है.
 
हालांकि कोलंबिया की जनता ने जनमत में इस शांति प्रक्रिया को नकार दिया था. इसके बाद फार्क और सरकार के बीच जारी शांति की बातचीत लटक गई थी. लेकिन कोलंबिया के इस नेता का नाम इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया.
 
जनता ने क्यों नकारी शांति प्रक्रिया
कोलंबिया सरकार और फार्क के बीच 50 सालों से संघर्ष चल रहा था. जिसकी वजह से अब तक 2 लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं जबकि साठ लाख लोगों बेघर हो गए. शांति समझौता के तहत फार्क के विद्रोहियों को सजा में रियायतें दी जा रहीं थी जो वहां की जनता को मंजूर नहीं था.
 
हिंसा के भी हैं आरोप
 ख्वान मानवेल सांतोस कोलंबिया के रक्षा मंत्री भी रह चुके हैं. बीबीसी रिपोर्ट की मानें तो उनके कार्यकाल के दौरान कोलंबिया की सेना ने इक्वाडोर में बने फार्क के कैंपों में हमला बोल दिया था.
इसकी जानकारी इक्वाडेर को भी नहीं दी गई थी. इस पर काफी विवाद हुई था और दोनों देशों में तनाव में पैदा हो गया. सांतोस के रक्षा मंत्री रहते सेना पर आरोप लगा था कि वह आम आदमी को मार रही है और मृतकों को विद्रोही बताया जा रहा है.
2010 में वह इसकी दम पर बड़ी संख्या में वोट बटोरे और राष्ट्रपति बन गए. इसके बाद उन्होंने फार्क से समझौता करने की प्रक्रिया शुरू कर दी.
 
क्या है फार्क
पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा समय तक विद्रोह फैलाने वाला संगठन है. इसमें किसान और मजदूर थे. जो कोलंबिया में असमानता के खिलाफ हथियार उठा लिया था. कोलंबिया में ज्यादातर जमीन का हिस्सा पैसे वाले  लोगों के पास ही है.