नई दिल्ली. आतंकवाद के मुद्दे पर चारों ओर से घिरे पाकिस्तान को अब अपने ही घर की आग में जलना पड़ रहा है. बलूचिस्तान में अत्याचारों को लेकर यूरोपियन यूनियन ने पाकिस्तान को खरी-खोटी सुनाई है. यूरोपीय यूनियन के उपाध्यक्ष रायसजार्ड जार नेकी ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन की घटनाओं को नहीं रोकता है तो यूरोपीय संघ उस पर आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंध लगा सकता है.
 
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मीडिया रिर्पोट्स के मुताबिक जारनेकी ने कहा कि मानवाधिकारों पर चर्चा के दौरान मैंने यूरोपीय संघ से कहा कि अगर हमारे सहयोगी देश मानवाधिकारों और मानकों को स्वीकार नहीं करेंगे तो ऐसी स्थिति में हमें उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के लिए मजबूर होना पडेगा. जारनेकी उस स्थान पर पहुंचे थे जहां प्रदर्शनकारी पाकिस्तान में बलूचियों पर जारी अत्याचार की निंदा कर रहे थे. उन्होंने मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि अब शब्दों की नहीं कार्रवाई की जरूरत है.
 
ईयू संसद के उपाध्यक्ष ने कहा कि पाकिस्तान के साथ हमारे आर्थिक और राजनीतिक संबंध हैं लेकिन अगर वह बलूचिस्तान के लिए अपनी नीतियों को नहीं बदलता तो हमें इस्लामाबाद और बलूचिस्तान के प्रति अपने रवैये को बदलना पड़ेगा.  उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का दोहरा मापदंड है. एक ओर तो वह दुनिया को अपनी साफ छवि दिखता है वहीं दूसरी ओर वह मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है. उन्होंने कहा कि ईयू के सभी 28 देशों को बलूच लोगों के प्रति पाकिस्तान के अत्याचारों की निंदा करनी चाहिए.