वाशिंगटन. कभी अजीब, कभी उटपटांग और कभी उत्तेजक बातें करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के पल-पल बदलते तेवर की वजह से वॉल स्ट्रीट जर्नल जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित अखबार की सोशल मीडिया पर खिल्ली उड़ गई.
 
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इस पूरे प्रकरण को समझने के लिए आपको ये समझ लेना चाहिए कि कोई भी अखबार एक ही दिन कई संस्करण छापता है, जो अलग-अलग इलाकों के लिए होते हैं. उदाहरण के लिए अगर दिल्ली से कोई अखबार मेरठ जाना है, तो सबसे पहले वो संस्करण छपेगा ताकि दिल्ली से अखबार मेरठ पहुंचाया जा सके. दिल्ली कि लोकल मार्केट में बिकने वाला पेपर सबसे आखिरी में छपेगा क्योंकि उसे ट्रांसपोर्ट करने में बहुत ज्यादा वक्त नहीं लगने वाला है.
 
वॉल स्ट्रीट जर्नल के साथ ये हुआ कि 1 सितंबर को छपे उसके दो अलग-अलग संस्करण में ट्रंप को लेकर दो तरह की हेडिंग थी. एक हेडिंग कह रहा थी कि इमिग्रेशन पर ट्रंप के तेवर नरम पड़े और दूसरी हेडिंग कह रही थी कि ट्रंप ने इमिग्रेशन पर तीखी बात की.
 
दरअसल, ट्रंप एक दिन पहले सुबह में मेक्सिको के राष्ट्रपति एनरिक पेना नीतो से मिले थे और तब उनकी बातचीत अच्छी हुई थी और सकारात्मक बातचीत को देखते हुए वाल स्ट्रीट जर्नल ने शुरू के संस्करण में हेडिंग लगा दी कि ट्रंप के तेवर इमिग्रेशन पर नरम पड़े.
 
लेकिन नीतो से मुलाकात के बाद एक कार्यक्रम में भाषण के दौरान ट्रंप ने इमिग्रेशन पर सख्ती दिखा दी और यहां तक कह डाला कि अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार खड़ा करने का खर्च देने के लिए वो मेक्सिको को मजबूर कर देंगे. इस भाषण की खबर अखबार में पहुंचने के बाद जो संस्करण छपा, उसकी हेडिंग बदलकर ‘ट्रंप ने दीवार पर कड़ी बात की’ कर दी गई.
 
 
इसके बाद सोशल मीडिया पर लोग वाॉल स्ट्रीट जर्नल के एक ही दिन के दो अखबार में दो तरह की हेडिंग को लेकर कई तरह के अनुमान लगा रहे थे, सवाल उठा रहे थे. कुछ लोग कह रहे थे कि ट्रंप के तेवर नरम पड़े हेडिंग वाला अखबार उस इलाके में भेजा गया जहां ट्रंप समर्थक रहते हैं और कड़े तेवर वाला अखबार उस इलाके में जहां हिलेरी क्लिंटन के समर्थक ज्यादा हैं.
 
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सोशल मीडिया पर एक ही दिन की दो हेडिंग वाले अखबार की चर्चा तेज़ होने पर सफाई दी और बताया कि कैसे पहली हेडिंग लगाई गई और फिर कैसे दूसरी हेडिंग लगी.